लखनऊ। चकबंदी से जुड़े वादों के निस्तारण में चल रही शिथिलता जल्द खत्म होगी। इसके लिए जिला प्रशासन राजस्व कोर्ट की तर्ज पर चकबंदी कोर्ट से जुड़ी वाद की सुनवाई से लेकर निस्तारण तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन करेगा। इससे सालों से चकबंदी से जुड़े विवाद निस्तारित कराने को कोर्ट के चक्कर काट रहे पक्षकारों को बड़ी राहत मिलेगी। जिलाधिकारी ने चकबंदी कोर्ट के पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांच साल से अधिक समय से लंबित चल रहे सभी वादों की नियमित सुनवाई कर इन्हें 30 सितंबर तक निस्तारित कराने का कार्य किया जाए। तय मियाद बाद बिना उचित कारण के लंबित मिलने वाले ऐसे वादों के लिए संबंधित पीठासीन को जिम्मेदार मान कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी प्रभारी व एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने दी।
उन्होंने बताया कि चकबंदी कोर्ट में लंबित वादों के निस्तारण में हो रही लेटलतीफी खत्म करने को वाद से जुड़े सभी दस्तावेजों को डिजिटाइज्ड कर फीडिंग कराने का कार्य अंतिम दौर में है। पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के सभी तरह के लंबित 294 वादों का निस्तारण 30 सितंबर तक पूरा करें। ऑनलाइन फीडिंग से पक्षकार भी राजस्व परिषद की वेबसाइट पर जाकर बस एक क्लिक पर अपने वाद से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।