कांग्रेस सांसद संजय सिंह और उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह के बेटे
अनंत विक्रम सिंह के बीच विरासत की लड़ाई रविवार को खूनी संघर्ष में बदल
गई।
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उसके बाद, सोमवार दोपहर संजय सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर अपनी पहली पत्नी और बेटे की नीयत पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि वे बीते 25 साल से किसी गरिमा को नहीं जानते।
संजय ने कहा कि पिछले एक-डेढ़ साल से मां-बेटे के बीच कोई डील हुई है, जिसकी वजह से वे जब-तब बवाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमिता से शादी करने से पहले उन्होंने पूरे परिवार की रजामंदी ली थी।
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हालांकि, राजघराने के करीबी सूत्रों की मानें तो संजय सिंह का इशारा मां-बेटे की खराब नीयत की ओर है। संजय को लगता है कि दोनों अब उनकी संपत्ति में बड़ा हिस्सा चाहते हैं।
बेटे की मांग, फिर से हो मोदी मर्डर केस की जांच
संजय सिंह ने एक तरफ अपने बेटे और पहली पत्नी की नीयत पर सवाल उठाया और बेटे पर बचकानी हरकतें करने का आरोप लगाया, तो उधर बेटे और मां ने भी पत्रकारों को बुलाकर एक के बाद एक संगीन आरोप लगा डाले।
बेटे अनंत विक्रम ने केंद्र सरकार से सैयद मोदी मर्डर केस की दोबारा जांच कराने के आदेश दिए हैं। बता दें कि संजय सिंह की मौजूदा पत्नी अमिता सिंह बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की पत्नी थीं। सैयद मोदी की संदेहास्पद हत्या के बाद ही अमिता और संजय सिंह की शादी हो गई थी।
संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा ने भी कहा कि बेटे और पौत्र के बाद हो रही नाइंसाफी के चलते ही उन्हें संजय सिंह के विरोध में उतरना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि रविवार को हुए खूनी संघर्ष के लिए खुद संजय सिंह जिम्मेदार हैं।
कैसे हुआ था खूनी संघर्ष
दरअसल, कांग्रेस सांसद संजय सिंह और उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह के बेटे
अनंत विक्रम सिंह के बीच विरासत की लड़ाई रविवार को खूनी संघर्ष में बदल
गई।
संजय सिंह और उनकी दूसरी पत्नी अमीता सिंह के रविवार को राजमहल
आने की खबर पर वहां पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों में हिंसक संघर्ष में एक
सिपाही की गोली लगने से मौत हो गई।
दोनों तरफ से सैकड़ों राउंड
फायरिंग हुई और ईंट-पत्थर चले। इसी बीच करीब ढाई बजे दिन में सांसद संजय
सिंह और उनकी पत्नी अमीता सिंह भूपति भवन के अंदर दाखिल हो गए। इस बवाल में
20 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया है।
देखते ही देखते बेकाबू हो गए हालात
भूपति भवन में भारी फोर्स जुटती देख रामनगर और आस-पास के गांवों के
लोग लाठी डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए। अफसरों ने उन्हें वहां से हटने को
कहा। इस बीच पुलिस ने कुछ लोगों को लाठियां भांजते हुए दौड़ा लिया। इससे
लोग उग्र हो उठे और फोर्स पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में पुलिस ने आंसू
गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की।
भीड़ ने की जवाबी फायरिंग, सिपाही को लगी गोली भीड़
पीछे नहीं हटी तो फोर्स ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। तब भीड़ की ओर से भी
सैकड़ों राउंड गोलियां चलाई गईं। इसी दौरान अमेठी कोतवाली में तैनात सिपाही
विजय मिश्र गोली लगने से घायल हो गया। विजय को जिला अस्पताल सुल्तानपुर
में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
उग्र हुई पुलिस, जो भी दिखा, दौड़ा-दौड़ाकर पीटा सिपाही
को गोली लगने से इस कदर उग्र हो गई कि सड़क पर जो भी दिखा, उसे
दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। मीडियाकर्मियों को पीटा और उनके कैमरे व वाहन तोड़
दिए। सिपाहियों की पिटाई में करीब 15-20 लोग घायल हो गए। जिला अस्पताल में
सिपाही की मौत हो जाने की सूचना पर भड़की फोर्स रामनगर सहित आस-पास के
गांवों में भी घुस गई और जमकर तांडव मचाया।
अमेठी राजघराने का यह विवाद करीब डेढ़ महीने से सड़क पर है। अनंत
विक्रम अपनी मां गरिमा सिंह व पूरे परिवार के साथ 25 जुलाई से ही भूपति भवन
में रह रहे हैं।
रविवार को जब संजय सिंह ने पुलिस प्रशासन को अमीता
के साथ राजमहल पहुंचने की सूचना दी। तब शांति व्यवस्था बनाने के लिए एडीएम
माताफेर व एएसपी मुन्नालाल के साथ ही जिले के सभी सीओ, थानाध्यक्ष व
सैकड़ों पुलिस कर्मियों के अलावा बड़ी संख्या में आरएएफ और पीएसी लगा दी
गई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमेठी के बवाल में जान गंवाने वाले
सिपाही विजय प्रताप मिश्र के आश्रितों को 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने
की घोषणा की है।