हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीतापुर में दर्ज दुष्कर्म के आरोप वाले मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य से शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के बीच लंबे समय से सहमति से संबंध होने का संकेत मिलता है।
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने शुक्रवार को पारित एक आदेश में कहा कि यह आरोप कि कांग्रेस सांसद राकेश राठौर ने शिकायतकर्ता से शादी करने का वादा करके शारीरिक संबंध स्थापित किया था, यह प्रथम दृष्टया कथित अपराध के होने को लेकर गंभीर संदेह पैदा करता है।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह एक जनसभा के दौरान कांग्रेस सांसद राकेश राठौर से मिली, जिसके बाद सांसद ने उसे राजनीतिक संरक्षण की पेशकश की। उसने यह पेशकश स्वीकार कर ली और इसके बाद दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी जिसके कारण उसे एक संगठन का जिला महिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
अदालत ने शिकायतकर्ता के पति के बयान का भी हवाला दिया, जिसने कहा कि कांग्रेस सांसद राकेश राठौर अक्सर उसकी पत्नी को अपने घर पर बुलाते थे और कभी-कभी वह देर रात तक वहां रहती थी। अदालत ने कहा, “उक्त परिस्थितियों के आधार पर अभियोजन पक्ष की सामग्री दो विवाहित और वयस्कों के बीच लंबे समय से विवाहेतर और परस्पर सहमति से बने संबंध का संकेत देती है।”