लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, एटा, कैसरगंज, डुमरियागंज, मछली शहर और बलिया में कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। लखनऊ और कैसरगंज में पांचवें चरण में चुनाव है। यहां नामांकन के लिए अब सिर्फ 15, 16 और 18 अप्रैल का ही समय है। 17 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश है।
लखनऊ में प्रत्याशी की घोषणा न होने पर कार्यकर्ताओं ने लोकसभा प्रभारी व महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री अनीस अहमद के सामने शनिवार को सख्त एतराज जताया। एक पत्रकार ने इसका वीडियो बनाना शुरू किया तो एक कांग्रेसी नेता ने उसे कार्यकर्ता समझते हुए उसके साथ धक्का-मुक्की की। नतीजतन, पत्रकार का मोबाइल गिरकर टूट गया।
हालांकि, बाद में उसके पत्रकार होने का पता चलने पर माफी भी मांगी गई। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि लखनऊ में अब उनके पास कोई काम नहीं हैं। प्रत्याशी तय नहीं हैं तो कहां प्रचार करने जाएं। किसके लिए लोगों से वोट मांगें। कमोबेश यही स्थिति बाकी आठ सीटों पर भी है।
कांग्रेस ने फिरोजाबाद में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई अक्षय यादव के खिलाफ तो प्रत्याशी नहीं उतारा, पर बदायूं में अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के खिलाफ सलीम शेरवानी को चुनाव मैदान में उतारा है। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
अक्षय सपा के मुख्य महासचिव राम गोपाल यादव के पुत्र हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना कि शुरुआत में यह संदेश देने के लिए कि कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ेगी, धर्मेंद्र के खिलाफ पार्टी हाईकमान ने प्रत्याशी उतारा था।
मामले पर एआईसीसी सदस्य व सांसद पीएल पुनिया का कहना है कि शेष सीटों पर भी जल्द ही प्रत्याशी घोषित कर दिए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता हर लोकसभा क्षेत्र में चुनावी घोषणापत्र को लेकर घर-घर जा रहे हैं। इसलिए लगातार प्रचार का काम भी चल रहा है। लोग कांग्रेस की नीतियों के आधार पर वोट देंगे।