गठबंधन के बावजूद कांग्रेस समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबियों के लिए मुश्किलें खड़ी करने में पीछे नहीं दिखाई दे रही है। नए सियासी दोस्त बने सपा-कांग्रेस 13 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते दिखाई दे रहे हैं लेकिन इनमें से लखनऊ मध्य, अमेठी और ऊंचाहार काफी अहम हैं।
यहां से मुलायम के भरोसेमंद माने जाने वाले तीन मंत्री रविदास मेहरोत्रा, गायत्री प्रसाद प्रजापति व मनोज कुमार पांडेय सपा के टिकट पर मैदान में हैं। हालांकि लखनऊ मध्य सीट पर नाम वापसी के दिन कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार मारूफ खान को पर्चा वापस लेने को कहा जरूर, लेकिन वे नहीं माने।
इसके बावजूद मारूफ के खिलाफ कांग्रेस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। वे पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं। दूसरी तरफ, सपा ने समझौते में कांग्रेस को दी गई सीटों पर नाम वापस न लेने वाले अपने कई उम्मीदवारों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में देरी नहीं की।
बाराबंकी की जैदपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार तनुज पुनिया के सामने डटे सपा के रामगोपाल ने पार्टी से निष्कासन के बाद पुनिया के समर्थन में सरेंडर तो कर दिया है लेकिन तकनीकी तौर पर वह अब भी उम्मीदवार हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति कानपुर की आर्यनगर सीट पर है, जहां कांग्रेस के प्रमोद जायसवाल ने सपा के अमिताभ बाजपेई का समर्थन तो कर दिया है, लेकिन तकनीकी तौर पर वह उम्मीदवार बने हुए हैं।
इन जगहों पर समझौते के मूड में नहीं है कांग्रेस
राहुल गांधी और अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
जहां तक अमेठी व ऊंचाहार का सवाल है तो कांग्रेस इन दोनों सीटों पर समझौते के मूड में नहीं है। ऊंचाहार में मनोज पांडेय के नामांकन कर देने के बावजूद कांग्रेस ने अजय प्रताप सिंह को मैदान में उतार दिया है तो अमेठी में गायत्री की उम्मीदवारी को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस ने अमीता सिंह को चुनाव लड़ाने का एलान कर दिया है। अमीता बृहस्पतिवार को नामांकन दाखिल कर सकती हैं।
गौरीगंज से भी कांग्रेस ने मो. नईम को मैदान में उतारने की घोषणा कर दी है जबकि मौजूदा सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह पर्चा दाखिल कर चुके हैं। भले ही इसे दोस्ताना मुकाबला बताया जा रहा हो, लेकिन तय है कि मुलायम के करीबी गायत्री व मनोज पांडेय के चुनाव जीतने की राह में कांग्रेस बड़ा रोड़ा बन सकती है।
हालांकि अंदरखाने कांग्रेस के इस कदम को मुलायम पर गठबंधन के साथ खड़ा होने का दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो गठबंधन को परवान चढ़ाने वाले सपा के शीर्ष नेताओं को विश्वास में लिए बिना कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकती है।
अखिलेश के एलान के बाद भी कांग्रेस डटी
अखिलेश यादव
हालांकि सपा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुल्तानपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत करते समय साफ कर दिया था कि अमेठी से गायत्री ही चुनाव लड़ेंगे।
इसके बाद लखनऊ में अखिलेश के साथ साझी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अमेठी-रायबरेली की सीटों को लेकर लचीले रुख के संकेत दिए थे।
इसके बावजूद अमेठी और ऊंचाहार को लेकर कांग्रेस का अड़ियल रवैया यह साबित कर रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं है। प्रचार कमेटी के अध्यक्ष संजय सिंह ने एलानिया लहजे में कह भी दिया है कि चाहे जो हो जाए, अमेठी से अमीता सिंह चुनाव जरूर लड़ेंगी।
गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे मुलायम
इसे दबाव मानें या फिर सियासी मजबूरी, मुलायम गठबंधन के पक्ष में प्रचार करने को राजी हो गए हैं। उन्होंने नाराज चल रहे शिवपाल यादव को भी मनाने का संकेत दिया है। मुलायम 11 फरवरी को जसवंतनगर तथा 13 फरवरी को मैनपुरी में सभा करेंगे। इसके बाद वे अन्य क्षेत्रों में भी गठबंधन के प्रत्याशियों के प्रचार के लिए निकलेंगे।
इन सीटों पर सपा और कांग्रेस आमने-सामने
- फोटो : amar ujala
सीट--कांग्रेस--सपा
लखनऊ मध्य--मारूफ खान--रविदास मेहरोत्रा
सरेनी(रायबरेली)--अशोक सिंह--देवेंद्र प्रताप सिंह
ऊंचाहार (रायबरेली)--अजय प्रताप सिंह--मनोज कुमार पांडेय
बलदेव (मथुरा)--विनेश कुमार--रणवीर
गंगोह (सहारनपुर)--नोमान मसूद--इंद्रसेन
कोल (अलीगढ़)--विवेक बंसल--अज्जू इसहाक
पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)--दीपक कुमार--उमा किरन
चांदपुर (बिजनौर)--शेरबाज खान--मोहम्मद अरशद
महाराजपुर (कानपुर)--राजाराम पाल--अरुणा तोमर
जैदपुर (बाराबंकी)--तनुज पुनिया--रामगोपाल
कानपुर कैंट--सोहेल अख्तर अंसारी--मोहम्मद हसन रूमी
भोगनीपुर (कानपुर देहात)--नीतम सचान--योगेंद्र पाल
आर्यनगर (कानपुर)--प्रमोद जायसवाल--अमिताभ बाजपेई