लखनऊ। मई में 110 करोड़ रुपये का पार्षद कोटा जारी हुआ। 55 करोड़ रुपये लागत के कामों के प्रस्ताव मांगे गए। इसके बाद भी पार्षद कोटा से अब तक एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ। इस पर उठे सवालों के बीच कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने कहा कि वह कोटा छोड़ देंगे, यदि उनके प्रस्ताव के सभी काम नगर निगम करा दे। ऐसे में कोटे को लेकर एक बार फिर विवाद छिड़ गया है, क्योंकि प्रदेश के किसी नगर निगम में कोटा नहीं दिया जाता है।
पार्षद कोटा समाप्त करने पर अंदर खाने में करीब दो साल से चर्चा चल रही है। एक साल पहले नगर निगम सदन में कोटा बढ़ाने को लेकर हुए बवाल पर महापौर सुषमा खर्कवाल ने अपना कोटा समाप्त करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद माहौल गरमा गया था। उधर, शासन स्तर पर भी मंथन हो रहा है कि जब किसी नगर निगम में कोटा नहीं है तो लखनऊ में क्यों दिया जा रहा है। नगर निगम कर्मचारी भी कई बार कोटे पर सवाल उठा चुके हैं, क्योंकि नगर निगम के खर्चे आय से भी ज्यादा हैं। यदि शासन से मदद न मिले तो नगर निगम कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे सकता।
नियमों की हर बंदिश से बाहर है कोटा
पार्षद कोटे से कराए जाने वाले कार्यों में होने वाली गड़बड़ी, बजट खपाने के लिए पहले से बनी हुई सड़कों को दोबारा बनाने के खेल कैसरबाग, अलीगंज, इस्माइलगंज सहित कई इलाकों सामने आ चुके हैं। नगर निगम प्रशासन ने अन्य कार्यों की तरह पार्षद कोटे के कार्य के लिए ई टेंडर और थर्ड पार्टी जांच की व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया, मगर सफल नहीं हो सका। दो साल पहले तत्कालीन नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने गुणवत्ता जांच को लेकर राइट्स संस्था से थर्ड पार्टी जांच कराने का आदेश किया था, मगर पार्षदों के विरोध के कारण जांच नहीं हुई। इसी तरह ई टेंडर व्यवस्था भी लागू नहीं हो पा रही है।
पार्षद कोटे में 100 प्रतिशत ऑफलाइन टेंडर
नगर निगम में हर साल करीब 250 करोड़ रुपये के काम पार्षद और महापौर कोटे से कराए जाते हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कोटे के कामों के लिए एक हजार से अधिक टेंडर जारी हुए। इनमें एक भी टेंडर ऑनलाइन नहीं हुआ। सभी काम ऑफलाइन टेंडर से ही कराए गए। इसके लिए हर टेंडर को 10 लाख रुपये से कम लागत का रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि ऑफलाइन टेंडर देने में मनमर्जी आसानी से चल जाती है। इंजीनियर और जनसेवक जिसे चाहते हैं, उसे ही टेंडर मिलता है। ऑफलाइन टेंडर के लिए पूरी सेटिंग जोन के सुपरवाइजर करते हैं। वही इस सेटिंग के लिए सिस्टम बनाते हैं और सुविधा शुल्क भी वसूल करते हैं। जनसेवकों और इंजीनियरोंं को यही कमीशन भी पहुंचाते हैं।
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Iनगर निगम की सामान्य निधि और नगर आयुक्त कोटे से जो भी काम कराए जाएंगे, वह सब ई टेंडर से होंगे। इसका आदेश जारी किया जा रहा है। नगर निगम ने पहल कर दी है। अब पार्षद चाहें तो ई टेंडर कराए या मैनुअल, यह उन पर निर्भर है। कोटे में टेंडर की जो व्यवस्था पहले से चल रही है, वह चलती रहेगी।I
I- गौरव कुमार, नगर आयुक्तI