समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि खुद को प्रधान सेवक कहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब मेवा खाने में बिजी हैं। वित्त विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा करनी पड़ती, इसलिए धन विधेयक के नाम पर तीन दिन में बगैर चर्चा के बिल पास करा लिया। वित्त विधेयक पारित होने के बाद छह महीने में 90 हजार करोड़ रुपये का डोनेसन उनकी पार्टी को मिला है।
लोकपाल व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में 23 मार्च से आंदोलन शुरू करने जा रहे अन्ना हजारे मंगलवार को जनसमर्थन के लिए सीतापुर पहुंचे। शहर के राजा कॉलेज मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस व भाजपा को लोकपाल का विरोधी करार दिया।
अन्ना बोले कि 2011 में जब हमने अनशन किया तो कांग्रेस सरकार ने लिखित में लोकपाल लाने की सहमति दी। लंबे संघर्ष के बाद कानून बना। लेकिन भाजपा सरकार आई तो भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगाने वाले इस कानून को कमजोर कर दिया। मोदी सरकार धारा 44 बिल लाई। जिसमें प्रावधान दिया कि अफसरों को अब अपनी सम्पत्ति घोषित करने की जरूरत नहीं है। भ्रष्टाचार का रास्ता खोल दिया।
लोकपाल पर बात करने से विरोधी पक्ष का नेता नहीं होने का हवाला देते हैं। तो लोकायुक्त लागू करो। इसमें तो विरोधी पक्ष के नेता की जरूरत नही है। अन्ना बोले कि भाजपा सरकार में इच्छाशक्ति का अभाव है। सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता का खेल चल रहा है। देश जाए गड्ढे में, किसी पार्टी को कोई मतलब नही है। पहले अंग्रेजों ने लूटा, अब पार्टियां लूट रही हैं। यह व्यवस्था बदलनी है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा व लोकसभा से बड़ी जन संसद है। मतदाता ही एमएलए, एमपी बनाता है। चाभी मतदाता के हाथ में है। बस वह भूल गया है। इसे जगाना जरूरी है। अन्ना हजारे ने 23 मार्च से होने वाले आंदोलन में आने तथा जरूरत पड़ने पर जेल जाने के लिए तैयार रहने की बात कही। इसके लिए उन्होंने जनता को हाथ उठवाकर संकल्प भी दिलाया।