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यूपी चुनाव: सपा में बदले जा सकते हैं घोषित उम्मीदवार

Thu, 01 Dec 2016 02:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
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सपा में टिकट वितरण के अधिकार को लेकर पैदा हुआ विवाद अब सुलझ सकता है। राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के बाद इसके आसार बढ़ गए हैं।
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संभावना है कि सीएम अखिलेश यादव की मंशा के अनुरूप विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी तय करने में उनकी राय को तरजीह दी जाएगी। इस मुद्दे पर सहमति बनते ही पूर्व घोषित उम्मीदवारों में बड़ा बदलाव हो सकता है।

मुलायम परिवार में लगभग दो महीने तक खुली जंग जैसे हालात रहे। 25वें साल में दाखिल होते वक्त सपा में वह सब कुछ हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। शिवपाल और उनके नजदीकी मंत्री बर्खास्त हुए तो रामगोपाल को सपा से निष्कासित किया गया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।
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एक समय स्थिति विस्फोटक होती दिख रही थी लेकिन पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने परिवार की एकता फिर कायम रखी। रमगोपाल का निष्कासन वापस लिया, पुराने पदों पर उनकी बहाली की।

एक्सप्रेस वे के लोकार्पण पर दूर हुई नाराजगी

रिश्तों की मधुरता की बानगी 21 नवंबर को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण समारोह में देखने को मिली।

शिवपाल ने रामगोपाल के पैर छुए तो सीएम ने उन दोनों के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई। लग नहीं रहा था कि यह वही परिवार है जिसके कुछ दिन पहले तक मतभेद सार्वजनिक मंचों पर मुखर हो रहे थे।

मुलायम, रामगोपाल और शिवपाल तीनों ने अखिलेश यादव की तारीफ की। सपा में बड़े उलटफेर का अनुमान लगा रहे लोगों के लिए यह चौंकाने वाला घटनाक्रम था।

जल्द होगा टिकटों का फैसला

उम्मीद है, सपा में प्रत्याशियों का फैसला अब जल्द हो जाएगा। पूर्व में लगभग 175 सीटों पर घोषित प्रत्याशियों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। शिवपाल ने मंगलवार को दिल्ली में रामगोपाल से मुलाकात में प्रत्याशी चयन के मुद्दे पर बात की है। इससे दो दिन पहले भी वह रामगोपाल से मिल चुके हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक रामगोपाल उम्मीदवारों को लेकर होमवर्क कर चुके हैं। मंडल प्रभारियों, जिला संगठनों और स्वतंत्र सर्वे की रिपोर्ट उन्हीं के पास है। शिवपाल लगातार कह रहे हैं कि प्रत्याशी चयन में जिताऊ होना मुख्य फैक्टर होगा।

रामगोपाल चाहते हैं कि उम्मीदवारों की अंतिम घोषणा से पहले उन पर अखिलेश की सहमति ली जाए। इस पर काफी हद तक सभी शीर्ष नेता एकमत हो गए हैं।

विवाद के समय अखिलेश यादव के जिन समर्थकों के टिकट काटे गए हैं, उन्हें भी फिर से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक मौजूदा विधायकों की उम्मीदवारी पर भी फैसला हो सकता है। संभावना है कि 50-55 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाएंगे।
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...लेकिन गाजीपुर में बदले हुए थे मुलायम के तेवर

एक्सप्रेस-वे पर रिश्तों को सहज बनाने के बाद गाजीपुर में सपा की रैली में मुलायम सिंह के तेवर बदले हुए थे। उन्होंने बर्खास्त मंत्रियों की वापसी न होने के लिए सीएम अखिलेश की आलोचना की और नसीहत भी दी।

माना जा रहा है कि मुलायम वहां जो बोले, वह वक्त की जरूरत थी। गाजीपुर रैली में मुख्य भूमिका निभाने वाले ओमप्रकाश सिंह, नारद राय और शादाब फातिमा मंत्री पद से बर्खास्त चल रहे हैं।

इस रैली में कौमी एकता दल के पूर्व नेताओं की भी भूमिका थी। अखिलेश कौएद के सपा में विलय का विरोध कर चुके हैं। ऐसे मंच पर मुलायम जैसे राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद थी।
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