‘नारी निकेतन में लड़कियों के रहने लायक आदर्श स्थितियां नहीं होती हैं। ऐसे में किसी लड़की को अंतिम विकल्प के रूप में यहां रखा जाना चाहिए, जब उसके पास रहने की दूसरी जगह न हो।’
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस टिप्पणी के साथ लखनऊ के महिला संरक्षण गृह में रह रही युवती को तुरंत वहां से रिहा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि युवती को अपनी मर्जी के मुताबिक जाने दिया जाए।
न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ मिश्र द्वितीय की खंडपीठ ने यह फैसला युवती की तरफ से उसके कथित पति के जरिये दायर याचिका पर सुनाया। इसमें युवती को महिला संरक्षण गृह से मुक्त किए जाने और उसे वहां रखने संबंधी सीतापुर की एक अदालत के आदेश को रद्द किए जाने का आग्रह किया गया था।