लखनऊ। इलाज की आस लेकर आई एक महिला की जान चली गई, और पीछे रह गए आंसुओं से भरे परिजन, जो अब इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। विभूतिखंड के एक निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर आठ लाख रुपये वसूलने के बावजूद 27 साल की रीता यादव को न तो राहत मिल सकी, न ही जीवन। आरोप है कि गंभीर हालत में उन्हें जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया, जिससे घर लौटते वक्त रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं।
अमेठी के ग्राम मोहन सरैया निवासी रीता यादव के पेट में दर्द हो रहा था। इस पर कुछ दिन पहले उन्हें सुल्तानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां पता चला कि उनकी आंत फट गई है। इस पर डॉक्टरों ने रीता को लखनऊ रेफर कर दिया। परिजन रीता को विभूतिखंड के मैकवेल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। 26 मार्च को भर्ती हुई रीता का 27 मार्च को ऑपरेशन हुआ।शुरुआती दिनों में रीता की स्थिति सामान्य थी, मगर ऑपरेशन के बाद स्थिति सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने हर बार परिजनों को तसल्ली दी, सब ठीक हो जाएगा, नींद की दवा दी है, थोड़ा और समय लगेगा, लेकिन रीता की हालत नहीं सुधरी।
जमीन बेचकर जुटाया इलाज का खर्च, फिर भी नहीं बची बहू
रीता के ससुर राम मिलन ने बताया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर 15 दिनों में करीब आठ लाख रुपये वसूल लिए। मजबूरी में उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी, इस उम्मीद में कि बहू ठीक होकर घर लौटेगी, लेकिन 10 अप्रैल को अस्पताल ने दो लाख रुपये और मांगे। कहा, बिना पैसे दिए मरीज को डिस्चार्ज नहीं करेंगे। परिजनों ने जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम किया, लेकिन रीता की मौत ने सबको तोड़कर रख दिया।
बिना सहमति के जबरन डिस्चार्ज, और रास्ते में छूटा साथ
राम मिलन ने बताया कि बृहस्पतिवार को मरीज के साथ सिर्फ वही अस्पताल में थे। बेटा और अन्य परिजन रुपयों के इंतजाम के लिए घर गए थे। तभी अस्पताल वालों ने दबाव बनाकर जबरन कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और गंभीर हालत में रीता को अस्पताल से बाहर कर दिया। वह घर तक नहीं पहुंच सकी, रास्ते में ही मौत हो गई।
थाने में दी तहरीर, मांगा इंसाफ
रीता की मौत से दुखी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के रवैये से नाराजगी जताई है। देर रात उन्होंने विभूतिखंड थाने में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर भी दी है। उनकी एक ही मांग है-इंसाफ।
मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही मिले तो कार्रवाई की संस्तुति होगी।
- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ
परिजनों ने मैकवेल हॉस्पिटल पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सुनील कुमार सिंह, इंस्पेक्टर विभूतिखंड
तीमारदारों का आरोप गलत है। वह अपनी मर्जी से मरीज को लेकर गए थे। उन्होंने डेढ़ लाख रुपये बिल का भुगतान भी नहीं किया।
- सौरभ सिंह, मैनेजर, मैकवेल हॉस्पिटल