उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीद-बिक्री और नामांतरण की प्रक्रिया जल्द ही पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होने जा रही है। यूनिक प्रॉपर्टी आईडी, जीआईएस मैपिंग और भू आधार जैसी व्यवस्थाओं के जरिये किसी भी संपत्ति का स्वामित्व, रिकॉर्ड और पहचान एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
रजिस्ट्री पूरी होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इसके लिए शनिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें स्टांप एवं पंजीकरण विभाग ने सुधारों का खाका पेश किया।
संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य होगी।
सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का काम पहले से चल रहा है। शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
पंजीकरण पूरा होते ही स्वत: शुरू हो जाएगी नामांतरण प्रक्रिया
- प्रस्तावित व्यवस्था में संपत्ति का पंजीकरण पूरा होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो, इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को विभागों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- जमीन अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी काम हो रहा है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी भू आधार दिया जाएगा। यह जियो रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ेगी।
- प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टांप एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डाटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।