राजधानी लखनऊ में आयकर विभाग की जांच के दायरे में आए मीट कारोबारियों के कश्मीर लिंक की केंद्रीय जांच एजेंसी से शिकायत हुई थी। इसके बाद एजेंसी की लखनऊ यूनिट से भी आयकर की गोपनीय रिपोर्ट को साझा किया गया था।
आयकर विभाग के अधिकारियों की मानें तो अभी इस प्रकरण में कश्मीर कनेक्शन के साथ कुछ कट्टरपंथी संगठनों को फंडिंग के बारे में गहनता से जांच करना जरूरी है। खासकर टेरर फंडिंग की आशंका को देखते हुए हर पहलू की पड़ताल की जानी चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि जांच में 1200 करोड़ रुपये की नकदी के लेन-देन होने के बाद उसे कहां खपाया गया।
दरअसल मीट कारोबारियों ने जिन अनुवादकों को काम पर रखा था, उनकी लोकेशन कई बार कश्मीर में पाई गई थी। केंद्रीय एजेंसी से हुई शिकायत में उनके पाकिस्तान जाने की आशंका भी जताई गई थी। कारोबारियों ने आयकर विभाग की पूछताछ में बताया था कि खाड़ी देशों से अधिकतर पत्र अरबी भाषा में आते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अनुवादक रखने पड़ते हैं।