हरदोई में बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में जमकर ‘खेल’ किया गया। पहले कुछ स्कूलों को परीक्षा केंद्रों की सूची से बाहर कर दिया। इसे लेकर बखेड़ा शुरू हुआ तो बाहर किए गए स्कूलों में से कुछ को सूची में शामिल कर लिया गया।
माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली व हरदोई के जिला विद्यालय निरीक्षक जेपी मिश्रा के खिलाफ लोकायुक्त से की गई शिकायत की शुरुआती जांच में इसका खुलासा हुआ है। यही नहीं, विद्यालयों की मान्यता देने में भी ‘खेल’ हुआ है।
इस मामले में लोकायुक्त ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ ही हरदोई के डीएम से भी जवाब तलब किया है। लोकायुक्त के नोटिस पर शिकायतकर्ता एक विद्यालय के संचालक भगत बाबा तेजगिरी ने अपने जवाब में हरदोई में परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में धांधली के साक्ष्य भेजे हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक गत 2 जनवरी को परीक्षा केंद्रों का अंतिम रूप से निर्धारण करते हुए 12 विद्यालयों को सूची से बाहर कर दिया गया।
इन विद्यालयों के प्रबंधकों ने डीएम के यहां आवेदन किया तो इनमें से चार को सूची में शामिल कर लिया गया।
पैसा लेकर किया सूची में शामिल
भगत बाबा का आरोप है कि जिन 12 विद्यालयों ने परीक्षा केंद्र बनाने के लिए निर्धारित राशि नहीं दी थी, उन्हें बाहर कर दिया गया। बाद में इनमें से चार ने पूरा पैसा पहुंचा दिया तो उन्हें 5 जनवरी को सूची में शामिल कर लिया गया।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि सभी 12 विद्यालयों से आंशिक रकम पहले ही जमा करा ली गई थी। विद्यालय प्रबंधकों ने डीएम को ज्ञापन देकर आरोप लगाया है कि एक-एक लाख रुपये अग्रिम ले लिए गए हैं। अब और पैसा मांगा जा रहा है।
लोकायुक्त ने परीक्षा केंद्र निर्धारण समिति के अध्यक्ष होने के नाते हरदोई के डीएम को नोटिस भेजकर पूछा है कि इन 12 विद्यालयों को किस आधार पर सूची से बाहर किया गया और सूची फाइनल हो जाने के बाद चार को क्यों जोड़ा गया?
डीएम से विद्यालय प्रबंधकों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि भी मांगी गई है। डीएम से 28 जनवरी से पहले जवाब देने को कहा गया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक अवध नरेश शर्मा व सचिव अमरनाथ वर्मा ने बुधवार को लोकायुक्त के समक्ष मान्यता संबंधी प्रकरणों पर भी पक्ष रखा।
लोकायुक्त ने की रिपोर्ट तलब
अधिकारियों ने बताया कि हरदोई के जिला विद्यालय निरीक्षक ने 28 विद्यालयों की मान्यता के लिए सिफारिश की है।
इनमें तीन विज्ञान इंटर कॉलेज हैं। अभी इसकी फाइल मंत्री को नहीं भेजी गई है। लोकायुक्त ने मान्यता के मानकों के संबंध में अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने महबूब अली और जेपी मिश्रा के खिलाफ शिकायतों को लेकर भी लोकायुक्त के समक्ष पक्ष रखा।
लोकायुक्त ने पूछा था कि जेपी मिश्रा का स्थानांतरण आदेश उन्हें क्यों नहीं पहुंचाया गया?
शिक्षा विभाग में नहीं बनती ट्रांसफर फाइल
अधिकारियों ने कहा कि विभाग में ट्रांसफर की फाइल नहीं बनती है। ट्रांसफर ऑर्डर आता है और वही आगे भेज दिया जाता है।
निदेशक ने कहा कि उनके पास 19 अगस्त को स्थानांतरण आदेश आया था। उन्होंने उसी दिन उसे मुख्यालय को भेज दिया था।
अपर निदेशक और उप निदेशक के पास से होता हुआ आदेश बाबू के पास पहुंचा और वहीं दब गया। अधिकारियों का कहना था कि जेपी मिश्रा को ट्रांसफर ऑर्डर रिसीव कराने का दायित्व मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक सुक्ता सिंह का था।
उनका कहना है कि ऑर्डर नहीं मिला जबकि उन्हें भेजा गया था। 27 नवंबर 14 को शासन से उन्हें ट्रांसफर ऑर्डर रिसीव कराने का आदेश आया और 28 नवंबर को रिसीव करा दिया गया।
इसके बाद वह हाईकोर्ट चले गए और स्टे ले आए। हाईकोर्ट के स्थगनादेश पर अभी विभाग की ओर से प्रति शपथपत्र नहीं दाखिल किया गया है।