प्रदेश में 2018-19 में फसल बीमा योजना में 6 बीमा कंपनियों को प्रीमियम का 771.64 करोड़ रुपये जमा कराया गया है, जबकि कंपनियों ने फसलों को हुए नुकसान की भरपाई में किसानों को मात्र 200 करोड़ 9 हजार रुपये का मुआवजा बांटा है। बृहस्पतिवार को विधानसभा में कृषि मंत्री की ओर से यह जानकारी दिए जाने पर विपक्ष ने फसल बीमा योजना में भ्रष्टाचार और घोटाले का आरोप लगाकर सर्वदलीय कमेटी से जांच की मांग की। उधर, सरकार ने विपक्ष के आरोप को निराधार बताते हुए जांच कराने से इनकार किया।
सपा के शैलेंद्र यादव ललई और निर्दलीय अमनमणि त्रिपाठी के सवाल के जवाब में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने बताया कि फसल बीमा योजना के लिए खुली निविदा में 18 कंपनियों ने आवेदन किया था। इनमें से 6 बीमा कंपनियों को चयनित किया गया है। सपा सरकार के समय केवल दो ही बीमा कंपनियों की मनमर्जी चल रही थी।
नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी और नरेंद्र वर्मा ने कहा कि फसल बीमा योजना में बीमा कंपनियों को 571 करोड़ रुपये ज्यादा दिया गया है। सरकार इस राशि को सीधे किसानों को देती तो हजारों किसानों को फायदा होता।