‘वर्चुअल कोर्ट’ एक एप है, जिसके सॉफ्टवेयर को एनआईसी द्वारा तैयार किया जाएगा। एप से ई-चालान पोर्टल जुड़ा होगा। साथ ही ट्रेजरी का एप (राजकोष) भी कनेक्ट किया जाएगा। दोनों एप का जुड़ाव होने के बाद जब यातायात पुलिस और परिवहन प्रवर्तन दस्ते ऑनलाइन चालान करेंगे तो उसका ब्योरा ‘वर्चुअल कोर्ट’ एप पर भी पहुंच जाएगा। वर्चुअल कोर्ट एप तय अवधि (यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते जब तय अवधि में प्रकरण का निपटारा नहीं कर पाएंगे) के बाद कार्रवाई शुरू कर देगा।
मनमानी पर लगेगा अंकुश
‘वर्चुअल कोर्ट ’ एप का शुभारंभ होते ही यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते की मनमानी पर अंकुश लगेगा। ऑनलाइन चालान करने में चूक हुई तो कार्रवाई करने वाले भी लपेटे में आएंगे। ‘वर्चुअल कोर्ट’ की खासियत यह भी होगी कि पूरी कार्रवाई पेपरलेस होगी।
परिवहन विभाग के वरिष्ठ सहायक संभागीय अधिकारी व आईटी सेल प्रभारी प्रभात पांडेय का कहना है कि लखनऊ वाहन मालिकों की सुविधा के लिए गोमतीनगर स्थित न्यू हाईकोर्ट परिसर में वर्चुअल कोर्ट बनेगी। इसके लिए न्यायाधीश की नियुक्ति भी होगी, जिनके निर्देशन में कार्रवाई होगी। इस सिलसिले में बीते दिनों प्रयागराज में बैठक हो चुकी है, जिसमें यातायात पुलिस के उच्च अफसरों ने भी शिरकत की थी।