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उपचुनावः सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे सपा-भाजपा

Wed, 10 Sep 2014 03:18 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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उपचुनाव का प्रचार समाप्त होने में बस दो दिन बचे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की चिंता जनता की दिक्कतें नहीं सिर्फ अपने लिए जैसे-तैसे वोट जुटाने की है। भाजपा, सपा पर आरोप लगा रही है तो सपा की कोशिश भाजपा को कठघरे में खड़ा करने में है।
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कांग्रेस व सपा बता रही हैं कि मोदी की सौ दिनों की सरकार ने कुछ भी नहीं किया तो भाजपा पलटवार कर रही है कि कई-कई दशक सरकार चला चुके दल सौ दिन की सरकार का हिसाब जानना चाहते हैं। यूं तो सपा और भाजपा एक-दूसरे के घोर विरोधी हैं, पर दोनों की बोली-बानी एक दिख रही है।

दोनों की आस जनता के मुद्दों पर नहीं, बल्कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से वोट मिलने की उम्मीद पर टिकी हैं। बाढ़ व सूखा, बिजली या कानून-व्यवस्था अथवा विकास नहीं बल्कि ‘लव जेहाद’ उपचुनाव का बड़ा मुद्दा हो गया है।
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राजनीतिक दलों का फोकस तीखे बयानों से वोट हासिल करने पर है। बाढ़ पीड़ितों की चिंता राजनीतिक दलों की बयानबाजी तक सीमित रह गई है।

अमित शाह का आदेश भी कर दिया अनसुना

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 19 अगस्त को भले ही पार्टी के कार्यकर्ताओं से बाढ़ पीड़ितों की दिल खोलकर मदद करने का आह्वान किया हो, लेकिन इस पर अमल होता नहीं दिख रहा। सपा सूबे में सरकार में है। लोग राहत व सहायता के लिए गुहार लगा रहे हैं, पर उसकी चिंता उसका निदान करने की नहीं, बल्कि तीखे बयान देकर लोगों को अपने पक्ष में लामबंद करने की है। न शब्दों की मर्यादा की सीमा रह गई है और न शैली की चिंता।

आजम बनाम योगी: उपचुनाव में सपा प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में बिजनौर गए मो.आजम खां ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच विवाह तो मुगलों के जमाने से होते रहे हैं। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है, पर भाजपा के लोग प्रेमियों को अपने तानाशाही बर्ताव के अनुसार चलाना चाहते हैं।

आजम के बाद बिजनौर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया, ‘आजम गलतफहमी में न रहें। अब कोई जोधा अकबर के साथ नहीं जाएगी, सिकंदर अब अपनी बेटी चंद्रगुप्त को देगा। आजम तैयार रहें क्योंकि अब लेने की बारी हमारी है।'

भाजपा विधायक और बिजनौर उपचुनाव में पार्टी के प्रभारी सुरेश राणा भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा, ‘आजम खां ने मां के दूध पिया हो तो आ जाएं। मुजफ्फरनगर तैयार है। उनके पैर टिकने नहीं दिए जाएंगे।’

मुलायम ने पार की सारी हदें

मैनपुरी में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे मुलायम सिंह यादव भी पीछे नहीं रहे। पोते तेज प्रताप यादव के समर्थन में क्रिश्चियन मैदान में सभा में कहा, ‘गुजरात दंगों की शिकार महिलाओं ने मुझे कपड़े उतारकर अपने जख्म दिखाए थे। मैंने अपनी आंखें पीछे की ओर कर लीं’।

कपड़े उतारकर दिखाने की बात तो मुलायम पहले भी लोगों को बता चुके थे, पर यहां वह एक कदम और आगे बढ़ गए। मुलायम ने सवाल किया कि मोदी और शाह क्या पूरे देश को गुजरात बना देंगे? क्या गुजरात मॉडल बनाकर महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में चोट पहुंचाएंगे?

दूसरे भी पीछे नहीं: बयानबाजी में दूसरे भी पीछे नहीं हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बोले कि उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव है क्योंकि सपा एकतरफा कार्रवाई करती है। अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा सत्ता में आई तो इसके लिए सपा की यही गलत नीतियां जिम्मेदार होंगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी बोले, सपा शासन में सांप्रदायिक सौहार्द खत्म करने की हरसंभव कोशिश होती है। अखिलेश सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा ही हमेशा सांप्रदायिक उन्माद भड़काती है। गुजरात के बाद अमित शाह की कुदृष्टि अब उत्तर प्रदेश पर है।
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ध्रुवीकरण ने निभाई बड़ी भूमिका

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि दुर्भाग्य से 90 के दशक के बाद यूपी की सियासत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बड़ा मुद्दा रहा है। बात दीगर है कि 1991 को छोड़ कभी भी सूबे की सियासत में बड़ा परिवर्तन कराने में इस ध्रुवीकरण की बहुत भूमिका नहीं दिखी।

बावजूद इसके जिसे मौका मिला, उसने इसे धार देने की कोशिश की। दरअसल, विकास और सार्थक मुद्दों पर राजनीति के लिए बड़ी दृष्टि व परिश्रम की जरूरत है। जब राजनीतिक दलों को लगने लगा कि लोग विकास के बजाय धर्म व जाति से जुड़े सवालों से ज्यादा रीझते हैं तो उन्होंने भी उसे ही खाद-पानी देना शुरू कर दिया।

कांग्रेस और सपा ने सरकार बनाने के लिए मुसलमानों को लुभाने का शॉर्टकट रास्ता अपनाया तो भाजपा को अपने आप खुद को हिंदुत्ववादी दल प्रचारित करने का प्रमाण पत्र मिल गया।

जब सियासत हिंदू व मुसलमान खेमे में बंटी हो, जातियां राजनीतिक दलों के साथ लामबंद होना शुरू कर दें तो फिर सार्थक और सकारात्मक मुद्दों पर मेहनत की जरूरत ही क्या है।
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