फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घरों में किराएदार रखने वाले लोगों के लिए बुरी खबर

Sat, 11 Jul 2015 09:19 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
घरों में गेस्ट हाउस चलाने वालों के साथ पेइंग गेस्ट और किराएदार रखने वालों से हाउस टैक्स के स्थान पर कॉमर्शियल टैक्स वसूला जाएगा। ऐसे घरों को चिह्नित करने के लिए विशेष अभियान चलेगा।
विज्ञापन


इसके बाद मकान मालिकों को कॉमर्शियल टैक्स वसूली का नोटिस जारी होगा। नगर विकास विभाग हाउस टैक्स वसूली का दायरा बढ़ाने के लिए इस संबंध में जल्द दिशा-निर्देश जारी करने वाला है।

शहरी क्षेत्रों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। छोटे-छोटे मकान तोड़कर गेस्ट हाउस बनाया जा रहा है या लोग खाली कमरों में पेइंग गेस्ट या किराएदार रख रहे हैं। नगर निगम नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसे लोगों से कॉमर्शियल टैक्स वसूली होगी।
विज्ञापन


इसके बाद भी नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे लोगों से कॉमर्शियल टैक्स वसूली नहीं हो रही है। नगर विकास विभाग में विगत दिनों उच्चाधिकारियों की बैठक हुई थी।

इसमें प्रदेश के 14 नगर निगमों में विगत वित्तीय वर्ष हाउस टैक्स वसूली की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि अधिकतर नगर निगमों में शत-प्रतिशत हाउस टैक्स की वसूली नहीं हो रही।
विज्ञापन

मकान में रहने वालों से होगी पूछताछ

इसके अलावा आवासीय क्षेत्रों से कॉमर्शियल टैक्स नाम मात्र का मिल रहा है। इसलिए तय किया गया है कि आवासीय क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे होगा। इस दौरान मकानों में रहने वालों से पूछताछ होगी कि वे किराए पर रह रहे हैं या पेइंग गेस्ट हैं।

गेस्ट हाउसों को भी चिह्नित किया जाएगा। मकानों के जितने हिस्सों में किराएदार रहते होंगे या गेस्ट हाउस चल रहा होगा, उतने क्षेत्र का कॉमर्शियल टैक्स लिया जाएगा। कॉमर्शियल टैक्स देने में आनाकानी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

इस पर नगर विकास सचिव श्रीप्रकाश सिंह का कहना है कि नगर निगम नियमावली के मुताबिक घरों में किराएदार, पेइंग गेस्ट रखने या गेस्ट हाउस चलाने वालों से कॉमर्शियल टैक्स लेने की व्यवस्था है। इसलिए नगर निगम अफसरों से ऐसे मकानों को चिह्नित कराते हुए कॉमर्शियल टैक्स की वसूली की जाएगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें