लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी के मुक्ताकाशी मंच पर शुक्रवार शाम उत्तराखंड की लोक संस्कृति के रंग छाए। अवसर था उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड महोत्सव का। मुनाल संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव में पारंपरिक लोक कला, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और क्षेत्रीय विविधताओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।
समारोह में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. पूर्णिमा पांडेय और केजीएमयू की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अर्चना घिल्डियाल मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत अंकिता बाजपेयी, नेहा वर्मा, कीर्ति राना, हेमा पांडेय और मंजू ने गणेश वंदना से की।
इसके बाद घसियारी, खुदेद और झूमेलो जैसे पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इन प्रस्तुतियों का निर्देशन दमयंती नेगी, त्रिलोचन रावत, विनोद रावत और हेमा डोबरियाल ने किया। कार्यक्रम में आयोजित नृत्य प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ऋचा जोशी, आकांक्षा आनंद और मेनका श्रीवास्तव निर्णायक भूमिका में रहे।
समारोह में उत्तराखंड के दिव्यांग कलाकार अमित नेगी व प्रो. सीमा भारद्वाज को डॉ. शिवानंद नौटियाल सम्मान से नवाजा गया। महोत्सव में लगे शिल्प, वस्त्र, व हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।