सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ संवेदनहीनता नहीं थम रही है। ताजा मामला बलरामपुर अस्पताल में बच्ची को इलाज न मिलने का है। आठ साल की बरखा के गले में सिक्का फंसने के बाद परिवारीजन रविवार को उसे बलरामपुर अस्पताल लेकर पहुंचे तो चार घंटे बाद आए डॉक्टर ने सिक्का निकालने के बजाय उसे घर भेज दिया।
इससे पहले बच्ची चार घंटे तक दर्द से तड़पती रही लेकिन इमरजेंसी में न तो एक्स-रे हुआ न अल्ट्रासाउंड। परिवारीजन मजबूरन बच्ची को घर ले गए लेकिन सिक्का अब भी गले में ही है।
रेजिडेंसी स्थित झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले विनोद की बेटी बरखा (8) के गले में रविवार को खेल-खेल में पांच का सिक्का फंस गया। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे विनोद बच्ची को बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी ले गए। बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।
ईएमओ ने देखा तो पता चला कि सिक्का ओरल कैविटी से नीचे उतर गया था। हालत गंभीर देख उसे भर्ती कर लिया गया। इनडोर ड्यूटी में तैनात डॉक्टर व स्टाफ ने ऑनकॉल ड्यूटी पर तैनात ईएनटी सर्जन को दोपहर करीब डेढ़ बजे बुलाया।