मोहनलालगंज। मजदूर से दो लाख रुपये की वसूली करने व तीन बार पैर काटे जाने के मामले मे मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सीएचसी अधीक्षक को पत्र भेजकर जांच करने का आदेश दिया है। अस्पताल का यह पहला केस नहीं है, इसके पहले अस्पताल एक किशोरी का पैर भी काट चुका है।
नगराम के गढी गांव के रहने वाले सुंदरलाल के मुताबिक, उनके भाई रामफेर (40) 21 जून को बाइक से मोहनलालगंज जा रहा था। रास्ते मे बाइक फिसलने से वह जख्मी हो गया था। मोहनलालगंज में लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर स्थित निजी अस्पताल लाने पर डॉक्टर ने बायां पैर व बायां हाथ टूटा होने की बात कहकर डेढ़ लाख रुपये इलाज के नाम पर ले लिए और पैर काट दिया। कटे पैर से खून बंद न होने न होने पर दोबारा ऑपरेशन किया और 50 हजार रुपये और ले लिए, लेकिन मजदूर की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल से निकाल दिया गया था। मजदूर दूसरे निजी अस्पताल में इलाज के लिए गया, जहां तीसरी बार जांघ से पैर काटना पड़ा। मामले की शिकायत सुंदरलाल ने पुलिस, सीएमओ व मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर भी की थी। सीएचसी अधीक्षक डाॅ. दिवाकर भारद्वाज ने बताया कि बुधवार को मजदूर के भाई ने सीएचसी आकर शिकायती पत्र दिया है। सीएमओ का पत्र भी आया है। जांच कर रिपोर्ट तलब की गई है
13 वर्षीय किशोरी की जिन्दगी से भी खिलवाड कर चुका है अस्पताल
उन्नाव के असोहा के रहने वाले मजदूर राजाराम ने बताया कि 23 अप्रैल को ऑटो से असोहा के राजाराम अपनी बेटी कामिनी (13) के साथ कालूखेड़ा से घर आ रहे थे, तभी हादसे में उनकी बेटी घायल हो गई थी। उसे मोहनलालगंज स्थित इसी हड्डी के अस्पताल लाया गया, जहां बेटी को कुछ दिन भर्ती करने के बाद जांघ का ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसका पैर सड़ने लगा। यहां से किशोरी को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। बाद में पैर काटकर उसकी जान बचाई गई।
रामफेरन।