इस मौके पर सीएम योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर तंज कसते हुए कहा कि वो जब अपनी विवेक से बोलते हैं तो अच्छा बोलते हैं। जब उन्हें ऊपर से निर्देश मिलते हैं तो वह मुर्गा की बात करने लगते हैं। उन्होंने यहां मुर्गा खाने पर भी व्यंग्य किया। सीएम ने एक शेर के माध्यम से तंज कसा
बड़ा हसीन है उनकी जबान का जादू,
लगा के आग बहारों की बात करते हैं।
जिन्होंने रात में बेखौफ बस्तियां लूटीं,
वही नसीब के मारों की बात करते हैं।
उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग कूप मंडूक हैं। अब वो पीडीए की बात करते हैं जिसका मतलब है कि परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी। पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है और ये लोग परिवार डेवलेपमेंट अथॉरिटी की तरह काम कर रहे हैं।
मुलायम के बाद शिवपाल का नंबर था
अपने भाषण में सीएम ने व्यंग्य भी किया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह के बाद कायदे से चाचा का नंबर आना चाहिए था लेकिन यहां भी चाचा को गच्चा मिला। उनकी इस बात पर पूरे सदन में ठहाका लग गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या भारत विकसित होगा तो उसमें उत्तर प्रदेश का भी योगदान होगा। क्या उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अधिक नहीं होनी चाहिए? क्या वह खुशहाली का हिस्सा नहीं होना चाहिए? इन सवालों पर हमने दो भागों में चर्चा को बांटा — पहला, 1947 से 2017 तक हमने क्या हासिल किया, और दूसरा, 2017 के बाद से आने वाले 30 वर्षों का रोडमैप। 1947 से 2047 तक की यह 100 वर्षों की यात्रा में हमने क्या खोया और क्या पाया, इसका आत्मावलोकन करने का यह सबसे उचित समय है। प्रधानमंत्री जी ने जो विजन डॉक्यूमेंट देश के सामने प्रस्तुत किया, उसी के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने प्रारंभिक चर्चा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है।
बिना भेदभाव के योजनाओं का लाभ ही समावेशी विकास का मंत्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में समावेशी और समग्र विकास को उत्तर प्रदेश और भारत के विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा, "हर विधानसभा क्षेत्र में विकास होना चाहिए और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के सभी तक पहुंचना चाहिए। समावेशी विकास ही 'विकसित यूपी' और 'विकसित भारत' की संकल्पना को साकार कर सकता है।" उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी चर्चा में विकास कम और सत्ता की चाहत ज्यादा दिखती है।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के अतीत की कड़वी सच्चाई को सामने रखते हुए कहा कि 1960 के बाद से राज्य लगातार गिरावट की ओर बढ़ा। उन्होंने कहा कि विशाल सामर्थ्य, उपजाऊ भूमि, नदियां और श्रमशक्ति होने के बावजूद नीतिगत उदासीनता के कारण यूपी 1980 के दशक के बाद देश का सबसे बीमारू राज्य बन गया। योजनाएं बनती थीं, घोषणाएं होती थीं, लेकिन न इच्छाशक्ति थी और न ही क्रियान्वयन का संकल्प। उन्होंने उस दौर की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिलता था, किसानों को राहत नहीं थी और निवेशकों में भरोसे की कमी थी। अपराध और अराजकता का बोलबाला था। पलायन, गरीबी, इन्सेफलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियों से होने वाली मौतें, भ्रष्टाचार, भेदभाव और भाई-भतीजावाद ने यूपी को जकड़ रखा था।
2017 के बाद यूपी का हुआ कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद डबल इंजन सरकार के तहत हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद कानून का राज स्थापित हुआ। अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई। उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया और यूपी निवेशकों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन बन गया। योजनाओं का क्रियान्वयन बिना भेदभाव और तुष्टिकरण के हो रहा है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज यूपी की पहचान सुशासन से है। बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकार की सकारात्मक सोच ने यूपी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री ने यूपी की आर्थिक प्रगति के प्रभावशाली आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2016-17 में यूपी की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। राष्ट्रीय जीडीपी में यूपी का योगदान 8 फीसदी से बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया है। प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। निर्यात 84 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये हो गया है और राज्य का बजट 3 लाख करोड़ से बढ़कर 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। नीति आयोग के फिसिकल हेल्थ इंडेक्स में 8.9 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। डिजिटल लेनदेन 122 करोड़ रुपये से बढ़कर 1400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी बीमारू राज्य से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बनने की ओर अग्रसर है।
भारत अपनी सामर्थ्य और शक्ति का परिचय दुनिया को दे रहा
मुख्यमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 में भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन 1980 तक यह 11वें स्थान पर खिसक गया। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने प्रगति की और 2017 में सातवें, 2024 में पांचवें और 2025 में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि आपने छठी अर्थव्यवस्था को 11वें स्थान तक पहुंचा दिया था, लेकिन आज भारत अपनी सामर्थ्य और शक्ति का परिचय दुनिया को दे रहा है।
यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में देश की 16 फीसदी आबादी निवास करती है, लेकिन 2016-17 तक राष्ट्रीय जीडीपी में उसकी हिस्सेदारी 14 फीसदी से घटकर 8 फीसदी रह गई थी। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की तुलना में एक तिहाई रह गई थी। लेकिन 2017 के बाद यूपी ने कोविड महामारी के बावजूद राष्ट्रीय औसत से बेहतर आर्थिक विकास दर हासिल की। मुख्यमंत्री ने यूपी को विकास और सुशासन का मॉडल बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यूपी अब केवल भारत का एक हिस्सा भर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नेतृत्व करने वाला राज्य बन रहा है। निवेशकों का भरोसा, युवाओं को रोजगार, किसानों को राहत और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं यूपी की नई पहचान हैं। उन्होंने सदन से अपील की कि सभी विधायक अपने क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए एकजुट होकर काम करें, ताकि यूपी और भारत के विकास का सपना साकार हो सके।