फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम योगी बोले: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, सहायिका की आय पर फोकस, शिक्षा मंत्री बोले- नहीं बढ़ेगा मानदेय

Tue, 30 Jul 2024 08:18 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा।
विज्ञापन
जवाब देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइयों और सहायिका की अन्य आय को बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सपा सदस्य राजेंद्र प्रसाद चौधरी द्वारा इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में इससे पहले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि इनका मानदेय बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं हो रहा है। वर्तमान में दिया जाने वाला भुगतान मानदेय आधारित है और न्यूनतम मजदूरी भुगतान के नियमों के दायरे में नहीं आता है।

विज्ञापन


योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा। उनके चयन में भी भेदभाव करते थे। हमारी सरकार ने 2022 में उनके मानदेय को न्यूनतम 2 हजार रुपए किया। इन सभी ने कोरोना काल में अपनी सेवाओं के माध्यम से शासन की योजनाओं को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में अभिनंदनीय काम किया है। 

हमने इनके मानदेय में वृद्धि भी की है और इन्हें टैबलेट से आच्छादित करने के साथ साथ अतिरिक्त आय का प्रावधान भी किया है। हमने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सचिवालय का निर्माण किया है। इसका उद्देश्य ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गांव को ही स्वावलंबी बनाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार किया जा सके। वहां पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में पंचायत सहायक रखा गया है। बीसी सखी रखी गई है, जो गांव के अंदर बैंकिंग लेनदेन का कार्य करती है।
विज्ञापन


हमने 6 महीने के लिए उन्हें एक निश्चित मानदेय के साथ जोड़ा, लेकिन जब बैंक से उनका कमीशन बन गया तो वह अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। सुल्तानपुर की एक बीसी सखी अब तक 15.50 लाख रुपए से अधिक का कमीशन प्राप्त कर चुकी है। पंचायत सहायक को भी हम 6 हजार रुपए प्रतिमाह देते हैं। साथ ही जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और अन्य सभी योजनाओं को जिनकी वह ऑनलाइन सर्विस उपलब्ध करा रहा है, उससे भी अतिरिक्त आय हो रही है।

विज्ञापन

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने श्रोत से ही देगा मानदेय

प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रोत्साहन मानदेय दिए जाने के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार इन शिक्षकों को मानदेय प्रबंध तंत्र को अपने श्रोत से ही देना होगा।विधान परिषद में एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल व राज बहादुर चंदेल ने संयुक्त रूप से यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों के लिए 2017 के बाद से सरकार ने कोई अतिरिक्त आर्थिक सहायता नहीं की है। जबकि पूर्व में 200 करोड़ दिया गया था। आज यहां के शिक्षक बंधुवा मजदूरों की तरह जीवनयापन कर रहे हैं। कोविड काल में इनको राहत पैकेज देने की मांग की गई लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।

2019 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने इनको 15 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान करने की घोषणा की थी लेकिन यह आज तक लागू नहीं हुआ। वहीं एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली बनाने व समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। इस पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने श्रोत से भुगतान करेगा। इनको मानदेय देने या मानदेय वृद्धि की सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरी तरफ एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन की पारश्रमिक सीबीएसई बोर्ड के अनुरूप करने की मांग की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें