नजूल की जमीन पर अवैध कब्जे करने वालों पर शिकंजा कसने के साथ ही इसका इस्तेमाल गरीबों और जनहित के कार्यों में करने की तैयारी है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन और उपयोग) विधेयक, 2024 को लेकर प्रवर समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का पूरा और तथ्यात्मक ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए।
अगली बैठक में जिलेवार कुल नजूल संपत्तियां, न्यायालयों में लंबित मामलों वाली जमीन, फ्रीहोल्ड की जा चुकी संपत्तियां, अवैध कब्जे और अन्य जरूरी अभिलेखों का ब्योरा रखा जाएगा। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भी जिलेवार तथ्यात्मक डाटा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वास्तविक आंकड़ों के बिना व्यापक नीति बनाना उचित नहीं होगा। वैध रूप से वर्षों से रह रहे लोगों, पुराने पट्टेदारों और गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हितों की रक्षा के साथ सरकारी जमीन की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी ने कहा कि नजूल जमीन का प्रावधान पुरानी व्यवस्था से चला आ रहा है। इसका इस्तेमाल गरीबों के हित में होना चाहिए और अतिक्रमणकारियों अथवा उद्योगपतियों को सरकारी जमीन पर नाजायज कब्जा नहीं करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई अवैध कब्जे निरस्त किए जा चुके हैं। बैठक में पुराने पट्टेदारों के अधिकार, निरस्त पट्टे, फ्रीहोल्ड संपत्तियां, बेदखली, मुआवजा और पुनर्वास के साथ अधिकारियों के विवेकाधीन अधिकारों पर नियंत्रण और भविष्य के उपयोग व आवंटन में पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया।
सरकारी और राजस्व रिकॉर्ड के अनुमानों के अनुसार प्रदेश में करीब 72 हजार एकड़ नजूल भूमि है, जिसकी अनुमानित कीमत दो लाख करोड़ रुपये से अधिक है। प्रयागराज में करीब 71 लाख वर्गमीटर नजूल भूमि बताई गई है। लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, सुल्तानपुर, गोंडा, वाराणसी, आगरा और बाराबंकी में भी बड़ी मात्रा में ऐसी जमीन है।