मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक फरमान प्रदेश के अफसरों पर भारी पड़ रहा है। यह आदेश है सुबह 9 बजे से 11 बजे तक आफिस में बैठने और फरियादियों की शिकायत सुनने का, लेकिन अफसरों का कहना है कि सुबह पहले घंटे कोई फरियादी नहीं आता। इसकी वजह से उनका समय बरबाद हो जाता है।
वैसे अब ठंड भी शुरू हो चुकी है इसलिए लोग भी दिन में एक बजे तक पुलिस अधीक्षक व जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं। तब तक अधिकारी उठ चुके होते हैं और फरियादी को वापस जाना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्यालय पहुंचने में तो और भी समय लगता है।
ऐसे में लोगों की समस्याएं निपटाने की न तो सरकार की मंशा पूरी हो रही है और न ही अधिकारियों के सुबह नौ बजे से आफिस में बैठने का कोई मतलब निकल रहा है। हकीकत यह है कि शिकायतकर्ता तो अपनी सहूलियत के हिसाब से ही निकलता है।
बता दें कि मुख्यमंत्री के आदेश का सख्ती से पालन कराने के लिए सीएम कार्यालय से समय-समय पर टेस्ट कॉल भी अधिकारियों को की जाती है। पिछले दिनों जब इसी तरह की कॉल की गई तो आधे से अधिक पुलिस कप्तान जिलों से गैरहाजिर मिले थे।
इसको लेकर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल की ओर से चेतावनी भी जारी की गई थी। अब दबी आवाज में अधिकारी सुबह 10 बजे वाली पुरानी व्यवस्था को ही बहाल करने की बात कह रहे हैं, लेकिन मामला मुख्यमंत्री के निर्देश से जुड़ा है, इसलिए कोई बोलने को तैयार भी नहीं है।