मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान 2018’ में प्रदेश के मेधावियों से रू-ब-रू हुए तो एक शिक्षक जैसे नजर आए। उन्होंने मेधावियों को कामयाबी का मंत्र दिया तो प्रतिभा को अच्छा माहौल देने का आश्वासन भी दिया। विद्यार्थियों से स्वच्छ व बेहतर समाज के लिए उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ जिंदगी के हर क्षेत्र में संतुलन हो तो कामयाबी कदम चूमती है। जीवन में कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता। इसलिए किसी को महत्वहीन न समझें।
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मुख्यमंत्री योगी ने जीवन की सफलता का यह मंत्र ‘अमर उजाला’ के सातवें वार्षिक प्रतिभा सम्मान समारोह में प्रदेश भर से आए हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के मेधावी छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए दिया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस समारोह में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह और शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह भी मौजूद रहे।
सफलता का शॉर्टकट नहीं... परिश्रम ही विकल्प
सफलता के लिए शार्टकट का रास्ता न अपनाएं। मंजिल पर पहुंचने के लिए सीढ़ी की जरूरत होती है। छलांग लगाने से चोट लग सकती है। कई बार यह छलांग जीवन को असाध्य बना देती है। इसलिए सफलता के लिए नकल के पीछे मत भागिए। परिश्रम का विकल्प नहीं होता है। जितना परिश्रम करेंगे, उतना फल मिलेगा। नकल करेंगे तो धराशाई होने का खतरा रहेगा।
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पढ़ाई का हर हिस्सा जरूरी
जीवन में कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता है। पढ़ाई में ही लीजिए। यदि किसी हिस्से को छोटा समझकर नजरअंदाज कर दिया और परीक्षा में उसी पाठ के सवाल आ गए तो... नतीजा होगा कि जिसे महत्वहीन समझा उसी की वजह से मेरिट में स्थान बनाने से चूक जाएंगे। इसी तरह जब जीवन में संतुलन बनाना जब सीख जाएंगे तब छोटे-बड़े को एक साथ रखकर सफलता की मंजिल पा सकेंगे।
व्यावहारिक ज्ञान सबसे जरूरी, मैं रोज इस संकट से होता हूं रू-ब-रू
अच्छी पढ़ाई करके कई लोग प्रशासनिक सेवा व अन्य क्षेत्रों में चले जाते हैं। वहां कठिन परिस्थितियां सामने आती हैं तो पता चलता है कि उन्होंने किताबी ज्ञान तो ले लिया, व्यावहारिक ज्ञान है ही नहीं। तब हर काम में कठिनाई दिखाई देने लगती है। मैं अक्सर यह देखता हूं। यदि व्यावहारिक ज्ञान नहीं लिया तो हम केवल मशीन बनकर रह जाएंगे। समाज के लिए हमारी कोई उपायदेयता नहीं रह जाएगी। इसलिए व्यावहारिक ज्ञान बेहद जरूरी है।
स्वच्छता मिशन के सहभागी बनें मेधावी
मुख्यमंत्री ने मेधावियों को स्वच्छ भारत मिशन का सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास, घर के आसपास के साथ मोहल्ले और पड़ोस के विद्यालय की स्वच्छता पर ध्यान दें।
किस्सा सुनाकर किया आह्वान : प्रिंसिपल की कुर्सी का उतना ही हिस्सा साफ, जितने पर वे बैठते थे
योगी ने चिंता जताई कि स्वच्छता को लेकर जिम्मेदारों में संवेदनशीलता का अभाव है। बड़ी-बड़ी डिग्री वालों के कार्यालय और उनकी सीट किसी पशु बाड़े से ज्यादा गंदे नजर आते हैं। एक स्कूल के भ्रमण की जानकारी देते हुए बताया कि वहां के प्रधानाचार्य की कुर्सी का केवल उतना हिस्सा ही साफ था, जितने में वे बैठते थे। बाकी सीट से लेकर कमरे तक धूल और जाले की भरमार थी।
अच्छे शिक्षक, अच्छा माहौल देगी सरकार
मेधावी छात्र सम्मान
- फोटो : amar ujala
सरकार ने विद्यार्थियों को अच्छे शिक्षक और अच्छा माहौल देने का प्रयास शुरू किया है। सभी सरकारी और एडेड स्कूलों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से रखने को कहा गया है। जब तक नियुक्ति हो रही है तब तक मानदेय पर रिटायर्ड शिक्षकों से पढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
ताकि हर बच्चे को मिले 75 फीसदी अंक
कक्षा 9-10 में एनसीटीई के पाठ्यक्रम लागू कर दिए हैं। पाठ्यक्रम को इतना सहज व सरल बनाने पर काम हो रहा है कि पूरी क्लास और घर पर पढ़ाई करने वाला हर विद्यार्थी कम से कम 75 प्रतिशत अंक पाएंगे। केवल पढ़ाई की जरूरत होगी।
‘वास्तव में यह सम्मान प्रदेश का अपना सम्मान है। शिक्षा समाज निर्माण में, राष्ट्र निर्माण में दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से करना सिखाती है। जरूरत है कि प्रतिभाशाली छात्रों की प्रतिभा सही दिशा में जाए।’
‘जैसे आज मेरिट में आने के बाद ‘अमर उजाला’ सम्मानित कर रहा है, वैसे ही जीवन में सम-विषम दोनों परिस्थितियों में धैर्य के साथ संयम बनाए रखते हुए आगे बढ़ेंगे तो इस तरह का सम्मान जुड़ता जाएगा।’
‘अमर उजाला के इस भव्य समारोह में सहभागी बनकर अच्छा लग रहा है। यह संस्थान 7 साल से होनहारोंको प्रोत्साहित कर रहा है।’
मेरिट में बेटियों का दबदबा, सीएम गदगद
प्रदेश की मेरिट में आने वाले 97 मेधावियों में से 62 बालिकाएं थीं। कल ही सीबीएसई के परिणाम आए। देश की मेरिट में प्रदेश की दो बेटियों ने सर्वोच्च स्थान हासिल किया। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं
नकल के चलते यूपी के विद्यार्थियों को अपमानित होना पड़ता था, अब ऐसा नहीं होगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के विद्यार्थी जब बाहर जाते थे तो नकल के चलते उन्हें खराब नजरों से देखा जाता था। पर, अब अपमानित नहीं होना पड़ेगा। सरकार ने नकल खत्म कर यह स्थिति बदलने का प्रयास किया। इसमें मीडिया का भी सराहनीय सहयोग रहा। हमहाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में नकल रोकने में सफल रहे हैं। प्रदेश में 12 लाख ऐसे विद्यार्थी थे जिनका यूपी से कोई लेना-देना नहीं था। सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराते थे। परीक्षा देकर रिजल्ट लेकर चले जाते थे। कई तो बिना परीक्षा में बैठे ही पास हो जाते थे। नकल के टेंडर होते थे। इससे नकचली आगे बढ़ जाते थे और पढ़ने वाले हतोत्साहित होते थे।
नकल न रोकते तो आधे मेधावी पुरस्कार से वंचित होते
हमने नकल रोकने की कोशिश की तो विरोधियों ने यह कहकर नकल के पक्ष में खड़े होने की कोशिश की कि यह युवाओं से खिलवाड़ होगा। सरकार को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। सोचना होगा कि वे नकल कराकर प्रदेश को कहां ले जाना चाहते थे। अब नकल रुकने के बाद यूपी के विद्यार्थी जहां भी जाएंगे, सम्मानजनक ढंग से देखे जाएंगे। यदि सरकार नकल न रोकती तो आधे मेधावी आज पुरस्कार से वंचित हो जाते। सही लोगों को पुरस्कार मिले, इसका प्रयास किया।