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कैबिनेट का फैसला: अभियुक्त की अनुपस्थिति में भी मिल सकेगी अग्रिम जमानत

Tue, 21 Aug 2018 07:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा - फोटो : amar ujala
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मंगलवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कैबिनेट बैठक में दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन) अधिनियम 1976 में संशोधन विधेयक को भी मंजूरी प्रदान कर दी गई। इसे आगामी विधानमंडल सत्र में पेश किया जाएगा। 

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सरकार के प्रवक्ता और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने विधेयक के सम्बंध में जानकारी देते हुए बताया कि इसके पास होने के बाद अग्रिम जमानत की सुनवाई के समय अभियुक्त का उपस्थित रहना अनिवार्य नहीं होगा।

न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत दिए जाने पर केंद्रीय प्रारूप में जो शर्तें न्यायालय के विवेक पर छोड़ी गई हैं, उन्हें प्रस्तावित प्रारूप में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की व्यवस्था की गई है। इसका उल्लेख धारा 438 (2) में किया गया है।
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इसके लिए जो व्यवस्था की गई है उसमें आवेदक को पुलिस अधिकारी द्वारा पूछताछ के लिए जब और जहां बुलाया जाएगा, उपस्थित होना होगा।

आवेदक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मामलों में तथ्यों से भिन्न किसी व्यक्ति को कोई धमकी या वचन नहीं देगा, जिससे कि उसे ऐसे तथ्यों को न्यायालय या किसी पुलिस अधिकारी को प्रकट न करने के लिए मनाया जा सके। साथ ही वह न्यायालय की बिना पूर्व अनुमति के देश नहीं छोड़ेगा।

इन मामलों में नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार गंभीर अपराध जैसे विधि विरुद्घ क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967, एनडीपीएस एक्ट 1985, शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923, गैंगेस्टर और समाज विरोधी क्रिया कलाप अधिनियम 1986 के साथ ऐसे अपराध जिसमें मृत्युदंड तक का प्रावधान है, ऐसे मामलों में अभियुक्त को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकेगी।

कुछ फैसले न्यायालय के विवेक पर छोड़े गए

विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि न्यायालय अग्रिम जमानत के लिए विचार करते समय मामले की प्रकृति और गंभीरता के साथ आवेदक का पूर्व इतिहास, न्याय से भागने की संभावना और उसे अपमानित करने के उद्देश्य से लगाए गए अभियोग जैसे बिंदुओं पर विचार कर सकती है।

अग्रिम जमानत की अंतिम सुनवाई के समय न्यायालय द्वारा लोक अभियोजक को सुनवाई के लिए नियत तिथि के कम से कम सात दिन पूर्व नोटिस भेजे जाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही अग्रिम जमानत के संबंध में आवेदन पत्र का निस्तारण आवेदन किए जाने की तिथि से 30 दिन के अंदर अंतिम रूप से निस्तारित किए जाने का प्रावधान है।

इसके अलावा दंड संहिता की धारा 438 में अग्रिम जमानत के लिए दी गई व्यवस्था पर पुनर्विचार करने केलिए प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इसी समिति ने धारा 438 दंड प्रक्रिया संहिता को संशोधित करने केलिए प्रस्ताव किया था।

बता दें कि इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस सरकार ने इस अग्रिम जमानत की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। इस मामले में अन्य राज्यों ने अपने अपने यहां इस कानून में संशोधन कर दिया था, केवल उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में ही इसमें संशोधन नहीं किया गया था। वर्ष 2010 में मायावती सरकार ने इस में संशोधन किया था, लेकिन राष्ट्रपति के यहां से इसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी और कुछ आपत्तियों के साथ इसे वापस प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था। पिछले जुलाई माह में राज्य सरकार ने इस संशोधन विधेयक को विधानमंडल में लाने की बात कही थी।
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अग्रिम जमानत का फायदा नहीं उठा पाएंगे अभियुक्त

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि इस नई व्यवस्था का लाभ अभियुक्त नहीं उठा सकेंगे। कुछ मामलों में कोर्ट के विवेक पर निर्णय छोड़ा गया है, जो यह फैसला करेगा कि अभियुक्त को अग्रिम जमानत देनी है या नहीं। यदि कोई अभियुक्त अग्रिम जमानत के लिए सीधे न्यायालय में पहुंचता है तो न्यायालय उसे अग्रिम जमानत तो दे देगी, लेकिन 30 दिन के अंदर उसे सरकार को भी सुनना होगा। यह व्यवस्था समिति ने पश्चिम बंगाल में इसे लेकर बनाए गए कानून से अंगीकृत की है। अरविंद कुमार ने बताया कि इस विधेयक को लाने से पहले इसका पूरा अध्ययन किया गया जिसके बाद इसे विधामंडल में लाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है। 
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