यूपी सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्घार्थनाथ सिंह।
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सिद्धार्थनाथ ने बताया कि ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजना 2014 से चल रही है। लेकिन पिछली सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रदेश में अब तक सिर्फ 4 फीसदी लोगों को ही पाइप से जलापूर्ति हो रही है। वहीं, तमिलनाडु, केरल और पंजाब में करीब 75 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को पाइप से पेयजल पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने का काम तेज करने जा रही है।
पहले चरण में इस तरह मिलेगा लाभ
क्षेत्र--गांव--परिवार
बुंदेलखंड क्षेत्र--2660--45 लाख
विंध्य क्षेत्र--1880--35 लाख
आर्सेनिक, फ्लोराइड--3700--75 लाख
जेई-एईएस प्रभावित
मिर्जापुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 10 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को दी जाएगी। कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में पिपराडाड़ और विसुंदपुर स्थित कृषि विभाग की 10 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी गई। अब जिला चिकित्सालय की 10.27 एकड़ जमीन को मिलाकर मेडिकल कॉलेज के लिए कुल 20.27 एकड़ भूमि मिल गई है। इस मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास पीएम मोदी ने 15 जुलाई को किया था।
राज्य सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि केंद्र सहायतित योजना के फेज-2 के तहत मिर्जापुर जिला चिकित्सालय में राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाने का फैसला किया गया था। इसकी स्थापना में केंद्र सरकार की 60 व राज्य सरकार 40 फीसदी खर्च की हिस्सेदारी होगी। कॉलेज निर्माण के लिए उप्र राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। इसके निर्माण पर 267.07 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें से 232.97 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति का शासनादेश जारी करते हुए केंद्र के हिस्से के 50 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना से मिर्जापुर के साथ ही सोनभ्रद, भदोही, चंदौली व इलाहाबाद के लोगों को भी फायदा मिलेगा। इससे वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर और मेडिकल कॉलेज पर दबाव कम होगा।
राजधानी के संजय गांधी पीजीआई में सात साल से बन रहे सेंटर ऑफ हिपैटोबिलियरी डिजीजेज एवं लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट के भवन निर्माण की पुनरीक्षित लागत को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। ये तीसरा मौका है जब इसकी लागत को बढ़ाया गया है। कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और संस्थान प्रशासन को चेताया है कि यूनिट का निर्माण इस बार हर हाल में पूरा होना चाहिए।
सरकारी प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट के भवन निर्माण की मूल परियोजना 26.67 करोड़ रुपये की थी। 23 फरवरी 2011 को इसकी पुरीक्षित लागत 62.42 करोड़ रुपये कर दी गई थी। इसके तुलना में जारी 59.21 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इसके बाद लेबर व निर्माण सामग्री में बढ़ोतरी, रोड, पॉली कार्बोनेट शीट, फॉल्स सीलिंग, ग्रेनाइट की मात्रा में बदलाव, एल्युमिनियम लुवर्स, पीवॉट टाइल्स, टफेन ग्लास डोर, एपोक्स फ्लोरिंग और एसएस नोजिंग के नए कार्य शामिल होने से परियोजना की पुनरीक्षित लागत 67.19 करोड़ रुपये तय की गई थी। 26 मई को व्यय वित्त समिति की बैठक में इसकी पुनरीक्षित लागत 67.19 करोड़ के सापेक्ष 67.16 करोड़ रुपये अनुमोदित की गई थी।
यूपी सरकार के प्रवक्ता सिद्घार्थनाथ सिंह।
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योगी सरकार ने प्रयाग कुंभ में विभिन्न अखाड़ों में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई पहल की है। प्रदेश कैबिनेट ने चार अखाड़ों में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर 5 करोड़ 19 लाख 95 हजार रुपये खर्च के प्रस्ताव को मंजूरीे दी है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि संगम तट पर हर 12 वर्ष पर महाकुंभ, 6 वर्ष पर कुंभ और बाकी 10 वर्षों में माघ मेला लगता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अनुयायी भारतीय संस्कृति और दर्शन के सनातनी मूल्यों का अध्ययन व अनुपालन करते हुए संयमित जीवन व्यतीत करते है और जन साधारण को भी इस संबंध में शिक्षित व जागरूक करते हैं। इलाहाबाद में अखाड़े कुंभ में भारतीय धर्म व संस्कृति के संवाहक होते हैं। इससे देश-विदेश में भारतीय संस्कृति व अध्यात्मिकता का प्रचार-प्रसार होता है।
उन्होंने कहा कि अखाड़ों में दी जा रही नैतिक शिक्षा, आध्यात्मिक उन्नति में उनके योगदान व उनकी महत्ता के मद्देनजर अखाड़ों में जरूरी अवस्थापना सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था की जाएगी। वहां चार अखाड़ों के पास खूद की भूमि है। इन अखाड़ों में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अन्य अखाड़ों से यदि प्रस्ताव आएंगे तो सरकार उस पर भी विचार करेगी।
प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की ओर से आयोजित होने वाली उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा के मौजूदा पाठ्यक्रम को संशोधित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि जमींदारी भूमि विनाश अधिनियम समाप्त हो चुका है। लेकिन उच्चतर न्यायिक सेवा के पाठ्यक्रम में यह अब भी शामिल है। हाईकोर्ट ने रेवेन्यू एक्ट के अनुसार पाठ्यक्रम संशोधित करने का प्रस्ताव किया था। कैबिनेट ने इसके लिए उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली-1975 के नियम-18 (परिशिष्ट-छ), नियम-20 (परिशिष्ट-छ 1) तथा नियम-21 (परिशिष्ट-ज) में संशोधन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। यह नियमावली का 13 वां संशोधन है।
इसके अलावा अन्य दो प्रस्तावों में कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा के 256 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वहीं, मैनपुरी में सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए जारी 10 करोड़ रुपये खर्च करने पर भी मुहर लगा दी।