मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई के साथ सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और काम पूरा होते ही खोदी गई सड़कों व गड्ढों को तत्काल भरा जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिलाधिकारी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थलीय निरीक्षण कर इसे देखेंगे और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकरी और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करेंगे। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करेंगे। इस काम में लापरवाही बरतने वाले काम को समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
टोल फ्री नंबर पर कीजिए शिकायत
जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग 18001212164 टोल फ्री नंबर पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2.50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
हर विधानसभा क्षेत्र में होंगे सड़कों के 50 करोड़ के काम
प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में सड़कों के 50 करोड़ रुपये के प्रस्ताव लिए जाएंगे। इसके लिए पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ने सभी जिलों से कार्ययोजना मांगी है। यह कार्ययोजना जनप्रतिनिधियों से मिले प्रस्तावों के आधार पर तैयार होगी।
सभी जिलों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में विधानसभावार जो कार्ययोजना बनी थी, उनमें जो काम बजट की सीमा के चलते स्वीकृत नहीं हो पाए थे, उन्हें इस बार की कार्ययोजना में स्वतः ले लिया जाए। विधायक अपने क्षेत्र में सड़कों के काम प्रस्तावित करेंगे। अगर ये काम 50 करोड़ रुपये से अधिक के होंगे, तो किन कामों को प्राथमिकता दी जाए, यह भी जनप्रतिनिधि ही तय करेंगे।
प्रत्येक जिले में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद डीएम कार्ययोजना को अनुमोदित करेंगे। उसके बाद इसे पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भेजा जाएगा। फाइनल स्वीकृति शासन स्तर से मिलेगी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, 28 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कैंटोनमेंट एरिया ज्यादा है। वहां पीडब्ल्यूडी को काम कराने के लिए क्षेत्र ही नहीं बचता। इन विधानसभा क्षेत्रों को छोड़कर सभी क्षेत्रों के कामों को कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी की योजना मई में ही कार्ययोजना का एक हिस्सा स्वीकृत कर देने का है, ताकि मानसून से पहले हर जिले में कुछ कामों को पूरा कराया जा सके।