मुख्यमंत्री ने कहा कि कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में धान की पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में सब्जी की खेती को प्रोत्साहित करने और तोराई के बीज का वितरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को वैकल्पिक खेती के बारे में जागरूक करना चाहिए।
19 जिलों में 40 फीसदी से कम बरसात
मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश में 33 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से 40 से 60 फीसदी तक ही वर्षा दर्ज की गई है। जबकि 19 जिलों में 40 फीसदी से भी कम बरसात हुई है। इन जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है।
93.22 लाख हेक्टेयर में हुई खरीफ की बोआई
मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीफ अभियान 2022-23 के तहत 20 अगस्त तक प्रदेश में 96.03 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 93.22 लाख हेक्टेयर (97.9 प्रतिशत) की बोआई हो सकी है। उन्होंने कहा कि बोआई लक्ष्य के अनुरूप है लेकिन कम वर्षा के कारण प्रदेश में फसलों को नुकसान होने की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 19-20 अगस्त की बारिश के कारण कई जिलों में राहत मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में तेज और अधिक बारिश होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि कृषि, सिंचाई, राहत, राजस्व विभागों को अलर्ट मोड़ में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने अगस्त के अंतिम सप्ताह तक सभी जिलों एवं कृषि विभाग से फसल की स्थिति, पेयजल की स्थिति एवं पशुओं के लिए चारा की उपलब्धता के संबंध में रिपोर्ट मंगाने के निर्देश भी दिए।
विकास खंड स्तर पर लगें वर्षा मापक यंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि तहसील स्तर पर रेन गेज़ यानी वर्षा मापक यंत्र लगाए गए हैं इन्हें विकास खंड स्तर पर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे वर्षा की और सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। उन्होंने कमिश्नरी स्तर पर मौसम अलर्ट के लिए यंत्र लगाने के निर्देश दिए। इस कार्य में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सहायता लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली के सटीक पूर्वानुमान की बेहतर प्रणाली का विकास की आवश्यकता है। किसानों को मौसम की सही जानकारी देने के लिए राज्य स्तर पर पोर्टल विकसित किया जाए।
पावर कार्पोरेशन के सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 13,16,399 निजी नलकूप हैं। इनमें 12,57,367 ग्रामीण अनमीटर्ड, 44,755 ग्रामीण मीटर्ड तथा 14,277 शहरी मीटर्ड कनेक्शन हैं। इनमें से लगभग सात लाख उपभोक्ताओं पर 800 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। विधानसभा चुनाव से पहले 1 जनवरी 2022 से सरकार ने निजी नलकूप की बिजली दर आधी कर दी थी। हाल ही में बकाया वसूली के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) भी लागू की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में निजी नलकूप धारकों ने पंजीकरण तो कराया लेकिन बकाये की पूरी धनराशि जमा नहीं की है जिससे बकाया समाप्त नहीं हो पाया है।