मुख्यमंत्री ने कहा कि खानपान सामग्री की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाए। अधोमानक, नकली, मिलावटी अथवा प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। सात मंडल मुख्यालयों पर सचल खाद्य जांच प्रयोगशालाएं शुरू हो गई हैं। मेरठ, गोरखपुर और आगरा में दवाओं के नमूनों का विश्लेषण करने की सुविधा भी शुरू हो गई है। उन्होंने लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, बस्ती, मुरादाबाद, झांसी, सहारनपुर, अलीगढ़, मिर्जापुर, बरेली, आजमगढ़, अयोध्या और देवीपाटन मंडल में मंडलीय प्रयोगशालाओं का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी तैनात कर इन कार्यों की हर दिन निगरानी की जाए। इसमें अनावश्यक देरी होने पर जवाबदेही तय की जाए।
जांच क्षमता को एक लाख से अधिक नमूनों तक बढ़ाने का निर्देश
- सीएम ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की खाद्य प्रयोगशालाओं में हर वर्ष 30 हजार नमूनों की जांच होती है। प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाते हुए इसे एक लाख से अधिक नमूनों की जांच तक पहुंचाना है। औषधि प्रयोगशालाओं की क्षमता 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार नमूने प्रतिवर्ष करना है।
- राज्य प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए सीएसआईआर, एनबीआरआई, डीआरडीओ जैसे संस्थानों की मदद ली जाए। प्रयोगशालाओं में जांच उपकरणों की कमी न रहे। मानकों के अनुरूप इनके रख-रखाव, वैधता अवधि, क्रियाशीलता आदि का परीक्षण किया जाए।
एफएसडीए में खाली पदों को जल्द भरें
सीएम ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्रम में ड्रग लाइसेंस जारी की प्रक्रिया एक तय समय सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि औषधि नियंत्रक के पद पर पूर्णकालिक तैनाती की जाए। औषधि एवं प्रयोगशाला संवर्ग की समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार नए पद सृजित करें। प्रयोगशालाओं में साइंटिफिक अफसर, माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट, विश्लेषक सहित अन्य पदों पर चयन की कार्यवाही की जाए।