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सीएम ने एक महीने में काम को कहा, अफसर ने तीन महीने बाद आदेश किया

Sat, 14 Sep 2019 02:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समयसीमा तय कर काम करने की न जाने कितनी हिदायतें दीं। खुद बैठकों में टाइमलाइन तय कराई। लेकिन, अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं। समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश के उलट उनकी बैठक का कार्यवृत्त ही तीन महीने बाद जारी किया। यह भी तब, जब उस बैठक में दिए गए निर्देशों पर अमल की टाइमलाइन बीते दो महीने बीत गए।

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दरअसल, मुख्यमंत्री योगी ने 10 जून 2019 को लोकभवन स्थित सभागार में शाम सात बजे समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग की समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में समाज कल्याण मंत्री व राज्यमंत्री, तत्कालीन मुख्य सचिव व समाज कल्याण आयुक्त तथा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव समाज कल्याण आदि शामिल हुए थे। 

मुख्यमंत्री योगी ने इस बैठक में 12 विषयों पर चर्चा की और प्रत्येक के निस्तारण के दिशानिर्देश के साथ अलग-अलग समयसीमा तय कराई। इन निर्देशों पर 15 दिन से एक महीने के बीच कार्यवाही की जानी थी। मगर, समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के इस बैठक का कार्यवृत्त पूरे तीन महीने बीतने के बाद 11 सितंबर को जारी किया गया। 
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अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का किस तरह पालन हुआ होगा। प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह से इस संबंध में बात के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

इस तरह कार्यवृत्त जारी होने की है व्यवस्था
शासकीय बैठकों में की गई चर्चा में लिए गए निर्णय को रिकार्ड पर लाने के लिए बैठक का कार्यवृत्त जारी किया जाता है। जिस विभाग की बैठक होती है, कार्यवृत्त वही जारी करता है। कार्यवृत्त जारी होने के बाद विभाग बैठक में लिए गए निर्णयों पर अमल की कार्यवाही शुरू करता है।

इसमें शासनादेश, प्रशासनिक आदेश या नियम-कानून में बदलाव, बजट व्यवस्था आदि जो भी निर्देश हों, कार्यवाही की जाती है। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि उनकी अध्यक्षता में संपन्न बैठकों के कार्यवृत्त उनके अनुमोदन के लिए अधिकतम तीन दिन में भेज दिए जाएं।

यानी अधिकतम अगले तीन दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय (बशर्ते मुख्यमंत्री कहीं बाहर न हों) से इनका अनुमोदन तय माना जाता है। अर्थात एक सप्ताह में कार्यवृत्त जारी हो जाने चाहिए।

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प्रमुख विषय व मुख्यमंत्री द्वारा तय कार्यवाही की समयसीमा

- मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के लिए दशमोत्तर व पूर्वदशम छात्रवृत्ति अनुदान जारी करने के लिए वित्त विभाग को निर्णय लेने का निर्देश दिया। समय- 15 दिन
- एक ही छात्र को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति दोनों देने के  औचित्य पर विचार-मंथन कर अद्यतन टिप्पणी से समस्त संबंधित विभागों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराना। समय- 1 माह
- इस वर्ष की छात्रवृत्ति का वितरण दो अक्तूबर व 26 जनवरी को कराने तथा समस्त विभागों द्वारा एकत्रित रूप से प्रत्येक जनपद में छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश। समय- 1माह
- अभी भी जिन पात्र व्यक्तियों को पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है, उन सभी को तत्काल पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। समय- 1 माह
- एसडीएम तथा बीडीओ स्तर पर लाखों की संख्या में लंबित पेंशन प्रपत्रों पर नाराजगी जताते हुए सभी लंबित प्रकरणों के निस्तारण के निर्देश। समय-1 माह
- गांवों में किसी निर्धन व बेहसारा व्यक्तियों की मृत्यु पर उनके अंतिम संस्कार के लिए ग्राम निधि से सहायता देने के निर्देश। इस काम के लिए सभी जिलाधिकारियों को 5-5 करोड़ रुपये देने का निर्देश। समय-1 माह
- अत्याचार से प्रभावित अनुसूचित जाति व जनजाति के व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक सहायता देने और एक्ट में दिए गए प्राविधानो के तहत जघन्य अपराधों से ग्रसित ेसे व्यक्तियों को पेंशन आदि देने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के निर्णय के लिए पेश करें। समय- 1 माह
- आश्रम पद्धति विद्यालयों व छात्रावासों के मरम्मत के लिए उपलब्ध बजट में बढ़ोत्तरी करने का विस्तृत प्रस्ताव देने का निर्देश। समय- 1 माह
- मुख्यमंत्री सामूहि विवाह योजना के संचालन पर संतोष व्यक्ति करते हुए 2019-20 के लिए तय लक्ष्य की पूर्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही। समय-तत्काल
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