मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समयसीमा तय कर काम करने की न जाने कितनी हिदायतें दीं। खुद बैठकों में टाइमलाइन तय कराई। लेकिन, अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं। समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के निर्देश के उलट उनकी बैठक का कार्यवृत्त ही तीन महीने बाद जारी किया। यह भी तब, जब उस बैठक में दिए गए निर्देशों पर अमल की टाइमलाइन बीते दो महीने बीत गए।
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी ने 10 जून 2019 को लोकभवन स्थित सभागार में शाम सात बजे समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग की समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में समाज कल्याण मंत्री व राज्यमंत्री, तत्कालीन मुख्य सचिव व समाज कल्याण आयुक्त तथा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव समाज कल्याण आदि शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री योगी ने इस बैठक में 12 विषयों पर चर्चा की और प्रत्येक के निस्तारण के दिशानिर्देश के साथ अलग-अलग समयसीमा तय कराई। इन निर्देशों पर 15 दिन से एक महीने के बीच कार्यवाही की जानी थी। मगर, समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री के इस बैठक का कार्यवृत्त पूरे तीन महीने बीतने के बाद 11 सितंबर को जारी किया गया।
अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का किस तरह पालन हुआ होगा। प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह से इस संबंध में बात के लिए कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इस तरह कार्यवृत्त जारी होने की है व्यवस्था
शासकीय बैठकों में की गई चर्चा में लिए गए निर्णय को रिकार्ड पर लाने के लिए बैठक का कार्यवृत्त जारी किया जाता है। जिस विभाग की बैठक होती है, कार्यवृत्त वही जारी करता है। कार्यवृत्त जारी होने के बाद विभाग बैठक में लिए गए निर्णयों पर अमल की कार्यवाही शुरू करता है।
इसमें शासनादेश, प्रशासनिक आदेश या नियम-कानून में बदलाव, बजट व्यवस्था आदि जो भी निर्देश हों, कार्यवाही की जाती है। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि उनकी अध्यक्षता में संपन्न बैठकों के कार्यवृत्त उनके अनुमोदन के लिए अधिकतम तीन दिन में भेज दिए जाएं।
यानी अधिकतम अगले तीन दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय (बशर्ते मुख्यमंत्री कहीं बाहर न हों) से इनका अनुमोदन तय माना जाता है। अर्थात एक सप्ताह में कार्यवृत्त जारी हो जाने चाहिए।