मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि लखनऊ समेत सभी शहरों की यातायात व्यवस्था को ठीक करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना सड़क पर चलने में काफी मुश्किल आती है। अक्सर ट्रैफिक जाम से लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने ये विचार मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर एमिटी विश्वविद्यालय के छात्रों की ओर से लखनऊ शहर के लिए गोमती नदी का इस्तेमाल करते हुए एक नई यातायात व्यवस्था की प्लानिंग पर दिए गए प्रस्तुतिकरण के अवसर पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा और मेरठ जैसे अधिकतर प्रमुख शहरों में यातायात की दिक्कत है। इसलिए अब हमें इन शहरों पर ध्यान देना होगा, ताकि ट्रैफिक की मुश्किलों से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे राज्य में यातायात व्यवस्था को ठीक करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ का फैलाव तेजी से हो रहा है। शहर की अवस्थापना सुविधाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार यहां की सड़कों के साथ-साथ अन्य अवस्थापना सुविधाओं का भी तेजी से विकास कर रही है।
ऐसे किया जाएगा सुधार
शहर में नए पुलों, आरओबी का निर्माण तो करवाया ही जा रहा है, साथ ही सड़कों को भी चौड़ा किया जा रहा है। आवागमन के नए विकल्पों पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि लखनऊ में मेट्रो रेल जैसी सुविधा अगले वर्ष अक्टूबर तक शुरू हो जाएगी।
एमिटी के छात्रों ने अपने प्रस्तुतिकरण में बताया कि लखनऊ शहर में लगभग 300 बसें, 17 हजार ऑटोरिक्शा और 12 लाख प्राइवेट वाहन हैं। छात्रों ने कहा कि गोमती नदी लखनऊ शहर के दोनों सिरों को जोड़ती भी है। अगर गोमती नदी का इस्तेमाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए किया जाए, तो इससे न केवल समय और पैसों की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह बहुत लाभकारी होगा।
प्रस्तुतिकरण के अनुसार इस प्रोजेक्ट में लगभग 60 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिससे शहर के आठों पुलों के पास डॉकयार्ड और नावों के संचालन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए विशेष प्रकार की कैटामारन फैरीज (नाव) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो महज दो फिट पानी में भी चल सकती हैं।
ऐसे बचेगा समय और पैसा
इससे गोमती नगर से चौक पहुंचने का समय न केवल घटकर आधा हो जाएगा, बल्कि इसका किराया भी सामान्य किराए से कई गुना कम हो जाएगा। इसके संचालन से पर्यावरण प्रदूषण और सड़क जाम पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तुतिकरण को बहुत ही बारीकी के साथ देखा और कुछ सुझाव भी दिए।
उन्होंने कहा कि लगभग तीस वर्ष पहले तक लखनऊ में गोमती नदी में चलने वाली नावें शहरी यातायात का प्रमुख साधन हुआ करती थीं। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह इस संबंध में एक बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां कहीं भी नदियां बहती हैं, वहां यातायात व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
प्रस्तुतिकरण के दौरान एमिटी विवि, लखनऊ परिसर के प्रति कुलपति सेवानिवृत्त मेजर जनरल केके ओहरी, निदेशक एमिटी बिजिनेस स्कूल प्रो. वीपी साही, उप निदेशक जनसंपर्क एवं संचार एमिटी विश्वविद्यालय आशुतोष चौबे और एमिटी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की कोऑर्डिनेटर दीप्ति पांडे राना भी थीं।