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प्लाज्मा थेरैपी पर क्लीनिकल ट्रायल भी करेगा केजीएमयू,जानिए क्यों है ये खास

Wed, 29 Apr 2020 02:00 AM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू - फोटो : अमर उजाला
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केजीएमयू में प्लाज्मा थेरैपी पर क्लीनिकल ट्रायल भी होगा। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंजूरी दे दी है। आईसीएमआर इसे अपनी निगरानी में कराएगा। हालांकि केजीएमयूू में प्लाज्मा थेरैपी शुरू कर दी गई है। रविवार को कोरोना संक्रमित एक मरीज को यह थेरैपी दी गई। हालांकि इस थेरैपी का क्लीनिकल ट्रायल बाकी है।

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केजीएमयू के रिसर्च डीन प्रो. आरके गर्ग ने कहा कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने देशभर के चिकित्सा संस्थानों से प्रस्ताव मांगा था। केजीएमयू के आवेदन को मंजूरी दे दी गई है। ट्रायल के लिए आईसीएमआर की ओर से तय गाइडलाइन भी भेजी जा चुकी है। इसके आधार पर केजीएमयू की एथिकल कमेटी की सिफारिश के बाद ट्रायल शुरू हो जाएगा।

नई चिकित्सा पद्धतियों के विकास से पहले क्लीनिकल ट्रायल जरूरी होता है। इसके तहत दवा, आहार संबंधी विकल्प, आहार की खुराक, चिकित्सीय उपकरण, जैव चिकित्सा आदि आते हैं। इसमें देखा जाता है कि संबंधित तकनीक से मरीज को कितना फायदा मिल रहा है। इसके पहलुओं पर अध्ययन किया जाता है। क्लीनिकल ट्रायल नए उपचार की पहले से उपलब्ध इलाज के साथ तुलना भी कर सकता है।
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क्लीनिकल ट्रायल के दौरान केजीएमयू में कोरोना के गंभीर और साधारण दोनों तरह के मरीजों को प्लाज्मा थेरैपी दी जाएगी। इस दौरान मरीज को अन्य दवाएं भी दी जाएंगी। फिर देखा जाएगा कि किस मरीज पर कितना असर हुआ? उसी हिसाब से थेरैपी के असर का मूल्यांकन होगा। केजीएमयू की ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि कोरोना मरीजों में प्लाज्मा थेरैपी कारगर होने के पर्याप्त सुबूत मिले हैं। इस आधार पर गंभीर मरीजों में यह थेरैपी शुरू कर दी गई है। लेकिन अभी इन्हें क्लीनिकल ट्रायल में शामिल नहीं किया गया है। जब यह शुरू किया जाएगा तो उसके बारे में संबंधित मरीज को जानकारी दी जाएगी। क्लीनिकल ट्रायल में शामिल होने वालों का पूरा ब्योरा रखा जाता है।

प्लाज्मा थेरैपी के क्लीनिकल ट्रायल का प्रोटोकाल आईसीएमआर ने तय कर केजीएमयू को भेज दिया है। इसके तहत ट्रायल में शामिल होने वाले मरीजों के पूरे विवरण की जानकारी देनी होगी। डोनर और मरीज दोनों का पूरा ब्योरा रजिस्टर्ड किया जाएगा। क्लीनिकल ट्रायल से पहले भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) से स्वीकृति की जरूरत पड़ती है।

केजीएमयू को डीसीजीआई से भी मंजूरी मिल गई है केजीएमयू के रिसर्च डीन प्रो. आरके गर्ग ने बताया कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर की मंजूरी मिल गई है। मरीज को प्लाज्मा थेरैपी देते वक्त पूरा विवरण आईसीएमआर को देना होगा। अपनी मर्जी से किसी भी मरीज को थेरैपी नहीं दी जा सकती है। बल्कि यह उन्हीं मरीजों को दी जाएगी, जिनके लिए वहां से संदेश दिया जाएगा।

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