फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलवायु परिवर्तन का नया खतरा: सबसे ज्यादा बनारसियों की उड़ी है नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ रहा प्रभाव

Mon, 20 Jul 2026 11:57 AM IST
Bhupendra Singh चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

जलवायु परिवर्तन का नया खतरा दिख रहा है। इससे न सिर्फ लोगों की नींद उड़ी है, बल्कि स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सबसे ज्यादा बनारसियों की  नींद उड़ी है। प्रयागराज दूसरे तो गोरखपुर तीसरे स्थान पर है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
नींद न आने की समस्या के लिए उपाय। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश में नींद खोने के मामले में वाराणसी (बनारस) के लोग सबसे आगे हैं। यहां के लोगों की हर साल औसतन 73 घंटे नींद कम हो रही है, जबकि 72 घंटे की कटौती के साथ प्रयागराज दूसरे तो 71 घंटे की कटौती के साथ गोरखपुर तीसरे स्थान पर है। हर साल नींद के घंटों में हो रही कमी की वजह जलवायु परिवर्तन है। इससे स्वास्थ्य एवं कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है। यह खुलासा हुआ है वैश्विक शोध संस्था क्लाइमेट सेंट्रल के अध्ययन में।

विज्ञापन


जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह लोगों की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है। क्लाइमेट सेंट्रल की ओर से भारत सहित दुनिया के 1,338 शहरों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक देश में पुडुचेरी के लोग वर्षभर में औसतन 92 घंटे की नींद खो रहे हैं।

मुंबई में 84 घंटे, कोलकाता में 80 घंटे और दिल्ली में 66 घंटे औसतन नींद में कमी आई है। उत्तर प्रदेश के शहरों में रहने वाले लोग हर साल औसतन 69 घंटे की नींद खो रहे हैं। अध्यन में शामिल 10 शहरों में शोधकर्ताओं ने 2020 से 2025 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इसमें नींद खोने के मामले में वाराणसी का ग्राफ सबसे अधिक मिला है।
विज्ञापन

 
शहर प्रतिवर्ष नींद कमी के घंटे
मेरठ 65
मुरादाबाद 66
बरेली 67
आगरा 69
अलीगढ़ 68
कानपुर 70
लखनऊ 70
गोरखपुर 71
प्रयागराज 72
वाराणसी 73

विज्ञापन

कम नींद से बढ़ रहा वजन

विभिन्न शोध में यह बात सामने आई है कि छह हफ्तों तक हर रात लगभग 80 मिनट कम नींद लेन वालों के वजन 450 ग्राम वजन बढ़ गया। उनकी शारीरिक गतिविधि भी कम हो गई। पर्याप्त नींद लेना केवल शरीर को आराम देने के लिए ही नहीं, बल्कि वजन को नियंत्रित रखने के लिए भी जरूरी है। नींद पर्याप्त नहीं होने से मानसिक ही नहीं हृदय, नर्व, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाती है। -डॉ. विपिन कुमार सिंह, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ केजीएमयू।

कम नींद से शरीर और मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित

अच्छी नींद जीवन की बुनियादी आवश्यकता है। लगातार कम नींद लेने से शरीर और मस्तिष्क दोनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। वयस्कों को सामान्यतः 7–9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए। लगातार इससे कम नींद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। नींद की कमी से एकाग्रता, याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता, कार्यक्षमता, रोग प्रतिरोधक प्रभावित होती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है। -डॉ. अजय कुमार वर्मा, विभागाध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन, लोहिया संस्थान

बचाव के उपाय:

  • रोज एक ही समय पर सोएं और जागें।
  • सोने से 1–2 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का उपयोग कम करें।
  • शाम के बाद चाय, कॉफी और निकोटीन का सेवन सीमित करें।
  • नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले नहीं।
  • यदि 2–3 सप्ताह से अधिक समय तक नींद की समस्या बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें