आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन का कहना है कि यह तकनीक पानी में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया, कवक, प्रोटोजोआ और सिस्ट को खत्म करती है। वहीं सभी अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय मानकों को भी इसमें पूरा किया गया है। आम प्यूरीफायर की तरह इसमें झिल्ली बदलने की जरूरत भी नहीं है।
ग्रामीण आबादी पी रही अशुद्ध पानी
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के नवागत महानिदेशक डॉ. शेखर सी मंडे का कहना है कि वर्तमान में ग्रामीण समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अब भी अशुद्ध पानी पी रहा है। यह पानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानकों को भी पूरा नहीं करता है। स्वास्थ्य के लिये सुरक्षित पेयजल की पहुंच लोगों तक बहुत जरूरी है।