लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र पर लेटलतीफी हावी है। आलम यह है कि जिस महीने में परीक्षा होती हैं, उसमें पढ़ाई की शुरुआत हो रही है। ऐसे में तमाम दावों और कवायद के बावजूद शैक्षणिक सत्र का बेपटरी होना तय है। इससे जहां विद्यार्थियों को तय अवधि में डिग्री न मिलने से दूसरी जगह दाखिले व नौकरी की ज्वाइनिंग में संकट आएगा तो शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश न मिल पाने का डर सता रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में सामान्य रूप से अप्रैल-मई का महीना सम सेमेस्टर परीक्षाओं के नाम रहता है। स्नातक और परास्नातक दोनों परीक्षाएं अप्रैल से मई के बीच में होने के बाद जून के आखिर तक परिणाम निकल आता है। इसके बाद जुलाई में नया सत्र शुरू हो जाता है। हालांकि, इस बार मार्च तक विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं चली हैं। इस वजह से सम सेमेस्टर की पढ़ाई अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू हो पाईं। यूजीसी के नियम के अनुसार सेमेस्टर में 90 दिन की कक्षाएं चलना जरूरी है। इस लिहाज से शैक्षणिक सत्र कम से कम डेढ़ से दो महीने देरी से समाप्त होगा, जिसका असर आने वाले सत्र पर भी पड़ेगा। लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार परीक्षा में देर होने से सत्र कुछ सुस्त चल रहा है। अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर इसे नियमित कराया जाएगा।
25 तक सभी रिजल्ट जारी करने का दावा
लविवि प्रशासन शैक्षणिक सत्र की देरी के बीच 25 मई तक सभी परीक्षा परिणाम जारी करने का दावा कर रहा है। परीक्षा विभाग के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तेजी से चल रहा है। इसके बाद सभी रिजल्ट जारी दिया जाएगा।
10 से आ जाएंगे परीक्षा फॉर्म
लविवि का परीक्षा विभाग 10 मई से सभी परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन जारी करने की बात कह रहा है। दावा है कि परीक्षा फॉर्म समय से भरने पर प्रवेश पत्र की गड़बड़ियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।