दीवानी न्यायालय गेट पर तैनात पुलिसकर्मी।
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रायबरेली। करीब 16 साल बाद अदालत की अवमानना के मामले में शहर कांग्रेस अध्यक्ष समेत तीन अधिवक्ताओं ने बुधवार को कोर्ट में समर्पण कर दिया। इस पर सीजेएम ने उन्हें जिला जेल भेज दिया। आत्मसमर्पण को लेकर दिनभर दीवानी कचहरी परिसर में गहमागहमी रही। पुलिस सतर्क नजर आई। कचहरी के आसपास पुलिस बल तैनात रहा।
अधिवक्ता एवं शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज श्रीवास्तव, रामू त्रिपाठी व गोपाल खन्ना के कोर्ट में आत्मसमर्पण के दौरान अधिवक्ताओं की भारी भीड़ जमा रही। वर्ष 2008 में अधिवक्ता रमेश चतुर्वेदी, पीपी तिवारी, धीरज श्रीवास्तव, रामू त्रिपाठी व गोपाल खन्ना के खिलाफ कोर्ट से अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए अवमानना का मामला हाईकोर्ट को संदर्भित किया गया था।
इसी दौरान रमेश चतुर्वेदी व पीपी तिवारी की मृत्यु हो गई। मामले में अधिवक्ताओं को तीन माह के कारावास की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर शेष तीनों अधिवक्ताओं ने बुधवार को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले अधिवक्ताओं के कोर्ट में सरेंडर करने की जानकारी किसी को नहीं थी। अधिवक्ताओं के कोर्ट में आत्मसमर्पण की जैसे जानकारी हुई, उनके साथी वकीलों की भीड़ जुट गई।
उधर, कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी ने बताया कि 16 साल पुराना अधिवक्ताओं का मामला था। इसमें शहर कांग्रेस अध्यक्ष को नामित किया गया था। कोर्ट की अवमानना की गई है। यह धीरज श्रीवास्तव का व्यक्तिगत मामला था। इससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है।