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ICSE-ISC Result: बाधाओं से नहीं रुकी हौसले की उड़ान, ओमैमा व आंचल को मिला मुकाम

Wed, 08 May 2019 10:39 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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ओमैमा और आंचल - फोटो : अमर उजला
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सीएमएस अलीगंज से कक्षा 12 पास करने वाली ओमैमा बचपन से ही प्रमस्तिष्क घात (सेरेब्रल पाल्सी) से पीड़ित हैं। इस बीमारी की वजह से ओमैमा सामान्य बच्चों की तरह चल नहीं पाती है। लिखने में उसकी गति सामान्य विद्यार्थियों से काफी कम है। 
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देखने में भी उसे समस्या होती है। इन परिस्थितयों के बावजूद ओमैमा ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उसने आईएससी-12वीं की परीक्षा 88 फीसदी नंबरों के साथ पास की है।

ओमैमा के पिता नासिर खान बिजनेसमैन हैं। जबकि मां सुबुही खान घर के साथ ही ओमैमा की सबसे बड़ी साथी हैं। सुबुही खान बताती हैं बचपन से ओमैमा प्रमस्तिष्क घात से पीड़ित हैं। इसलिए घर के पास ही उन्होंने उसका दाखिला कराया।
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ओमैमा बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी रही है लेकिन अपनी गति की वजह से उसे समस्या का सामना करना पड़ता था। ऐसे में उसके स्कूल ने काफी मदद की। नोट्स कॉपी करने के साथ ही समय-समय पर वे घर पर आकर भी ओमैमा की मदद करते थे।

सहपाठी लेकर जाते हैं स्कूल बैग

औमैमा अपना बैग खुद लेकर नहीं जा पाती है ऐसे में स्कूल के गेट से उसके सहपाठी ही यह जिम्मेदारी निभाते हैं। ओमैमा बताती हैं कि उनकेसाथी पढ़ाई से लेकर हर काम में उसे काफी सहयोग करते हैं। इसी वजह से उसे कोई विशेष समस्या पेश नहीं आती है।

बैंकर बनना चाहती है ओमैमा
ओमैमा की साहित्य में काफी रुचि है। वह अंग्रेजी में कविताएं भी लिखती है। उसका सपना आगे चलकर बैंकर बनना है। इसके लिए वह तैयारी शुरू करना चाहती हैं। उसके अनुसार वह खुद अपने पैरों पर खड़े होकर इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को संदेश देना चाहती है कि वे कुछ भी कर सकते हैं।
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दृष्टिबाधित आंचल ने प्रथम श्रेणी में पास की परीक्षा

लखनऊ पब्लिक स्कूल एंड कॉलेजेस से 12वीं पास करने वाली आंचल की सफलता अन्य विद्यार्थियों के मुकाबले कहीं ज्यादा खास है। जन्म से दृष्टिबाधित आंचल ने सामान्य विद्यार्थियों की तरह पढ़ाई करके आईएसी में 66.5 फीसदी अंक हासिल किये हैं। आंचल ने दसवी में 85.5 फीसदी अंक हासिल किये थे।

आंचल के पिता जगदीश सैनी राजाजीपुरम में बिजनेसमैन तथा मां रीना सैनी गृहिणी हैं। देख न पाने की वजह से आंचल अपने साथियों तथा घरवालों की मदद से पढ़ाई करकेअपने कोर्स याद करने की कोशिश करती है। परीक्षा में राइटर की सुविधा दी जाती है।

आंचल ने बताया कि उसका सपना है कि वह रेडियो जॉकी बने। इसके लिए वह अभी से अभ्यास भी करती है। इसके लिए उसके घरवाले भी पूरा सहयोग दे रहे हैं।
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