सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और सीएसआईआर की महा
लखनऊ। आयुष औषधियों की गुणवत्ता, शुद्धता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में राजधानी स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने 14 भारतीय निर्देशक द्रव्य विकसित किए हैं, जो भारत के स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ पदार्थ (रिफरेंस मटीरियल) हैं। इससे आयुष, हर्बल और न्यूट्रास्युटिकल उत्पादों की जांच और गुणवत्ता नियंत्रण को नई मजबूती मिलेगी।
सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. करुणा शंकर ने बताया कि इससे भारतीय आयुष उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक भरोसेमंद बनेंगे। साथ ही आयुष उद्योग में मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी।
सीमैप और सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के संयुक्त प्रयास से विकसित इन फाइटोकेमिकल भारतीय निर्देशक द्रव्यों का विमोचन एनपीएल के 80वें स्थापना दिवस के माैके पर दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी माैजूद रहे।
ये भारतीय निर्देशक द्रव्य आयुष औषधियों में उपयोग होने वाले कच्चे माल और उत्पादों की सटीक जांच, विधि सत्यापन और उपकरणों के कैलिबरेशन में मदद करेंगे। अब तक इस तरह के मानकों के लिए उद्योग को विदेशी संदर्भ पदार्थों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस पहल से आयात पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
जानिए क्या है भारतीय निर्देशक द्रव्य
भारतीय निर्देशक द्रव्य भारतीय प्रमाणित संदर्भ सामग्री (सीआरएम) है जो माप की सटीकता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशालाओं और उद्योगों में एक बेंचमार्क के रूप में उपयोग होता है, जैसे सोने की शुद्धता जांचने (बीएनडी-4201) या वायु गुणवत्ता मानकों को मापने में, जिससे भारतीय उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय विश्वसनीयता बढ़ती है और माप अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होते हैं।