सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति करता था। यहीं से उसका संपर्क अपराधियों से हुआ। उसने विश्वविद्यालय के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी की 11 दिसंबर 2006 को गोली मारकर हत्या कर दी। बताते हैं कि वारदात की रात में जय सिंह, अंशुल दीक्षित उर्फ अंशु व सुधाकर पांडेय के बीच किसी बात पर विवाद हुआ। इसी दौरान अंशु ने विनोद त्रिपाठी व गौरव सिंह को गोली मार दी थी। वारदात के कुछ दिन बाद पुलिस ने जय सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया था।
अंशु को पुलिस ने 2008 में गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध असलहों के साथ पकड़ा था। छह साल बाद ही वह पेशी से लौटते समय सीतापुर रेलवे स्टेशन पर सिपाहियों को जहरीला पदार्थ खिलाकर फायरिंग करते हुए फरार हो गया था। उस पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ था। उसके बाद उसके भोपाल में उसकी लोकेशन मिली थी। जिस पर एसटीएफ लखनऊ की टीम उस की गिरफ्तारी के लिए वहां गई। वहां एसटीएफ व भोपाल क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम के साथ उसकी गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर फायरिग शुरू कर दी। जिसमें एसटीएफ के दरोगा संदीप मिश्र को गोली लगी वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच के सिपाही राघवेंद्र भी घायल हो गया था।
भोपाल में अलकापुरी इलाके में गलत नाम-पते से किराए का मकान लेकर रह रहा था। अंशु का नाम लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित डीआरएम कार्यालय के बाहर गोरखपुर के तिवारीपुर से तत्कालीन सभासद फैजी की हत्या व सीएमओ हत्याकांड में भी नाम आया था। अंशु ने छह माह तक भोपाल में भी फरारी काटी थी। उस पर भोपाल में भी 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी का खास व शार्प शूटर रहा था। 2014 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। सुल्तानपुर जेल में बंद था, लेकिन चित्रकूट जेल में सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक होने से करीब दो वर्ष पहले यहां भेजा गया था। अंशु दीक्षित आठ दिसंबर 2019 को यहां भेजा गया था। लखनऊ सीएमओ हत्याकांड में भी अंशु दीक्षित शामिल था। वह पूर्वांचल के माफियाओं के काफी करीब रहा है।