रायबरेली। स्कूल संचालकों ने 160 से अधिक वाहनों का फिटनेस नहीं करवाया है। अनफिट वाहनों से रोजाना बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की जान को खतरा है। मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए एआरटीओ ने स्कूली वाहनों का फिटनेस न करवाने तक पंजीयन को निलंबित कर दिया है। सात दिन में फिटनेस न कराने पर वाहनों के पंजीयन को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
एआरटीओ कार्यालय में वर्तमान में करीब 1261 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 160 से अधिक स्कूली वाहनों का लंबे समय से फिटनेस नहीं कराया गया। अनफिट वाहनों से बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की जान का लगातार खतरा बना हुआ है। किसी भी दिन बच्चों के साथ बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
एआरटीओ ने ऐसे स्कूली वाहनों का संचालन कराने वाले स्कूल संचालकों को नोटिस देकर वाहनों के फिटनेस करवाने के आदेश दिए हैं। फिटनेस न करवाने तक वाहनों के पंजीयन को निलंबित भी कर दिया गया है। स्कूल संचालकों को निर्देशित किया गया है कि अनफिट वाहनों से किसी भी अप्रिय घटना के लिए संबंधित स्कूलों के संचालक और प्रिंसिपल दोषी होंगे।
स्कूली वाहनों में इन नियमों का पालन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट की गॉइडलाइन के अनुसार, स्कूली बस या अन्य वाहन पीले रंग से पेंट होनी चाहिए। साथ ही बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो। सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए। बस में अग्निशमन यंत्र लगा हो, जिससे आग लगने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके। स्कूल बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए। दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए। इसके साथ चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो। ड्राइवर के पास लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट परमिट होना चाहिए।
स्कूल संचालकों को सात दिन में वाहनों के फिटनेस करवाने के निर्देश दिए गए हैं। अनफिट वाहनों से स्कूली बच्चों का परिवहन किया जाना दंडनीय अपराध है। किसी भी अप्रिय घटना के होने पर ऐसे विद्यालय के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
- मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ (प्रवर्तन/प्रशासन)