राजधानी के केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में सोमवार को अगल-अलग जिलों से आए होनहार विद्यार्थियो
लखनऊ। क्या कम उम्र में ही बच्चे भी सीधे वैज्ञानिक बन सकते है, अपनी खोज और नवाचारों को वो कैसे और कहां रजिस्टर्ड करा सकते हैं, बच्चों के शोध को किस जर्नल में प्रकाशित करा सकते है। कुछ ऐसे ही जिज्ञासा भरे सवालों को लेकर राजधानी के केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में सोमवार को अगल-अलग विद्यालयों के होनहार विद्यार्थी इकट्ठे हुए थे। सबकी आंखों में विज्ञान की दुनिया में कुछ बड़ा करने के सपने थे, योजनाएं थीं। जिसे पंख दिए सीएसआईआर के जिज्ञासा कार्यक्रम ने।
देशभर के स्कूलों के बच्चों ने जिज्ञासा कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से चुने हुए बच्चों को 21 से 25 जुलाई के बीच ''एक दिन के वैज्ञानिक'' के तहत सीएसआईआर की चारों प्रयोगशालाएं बच्चों की सहभागिता करा रही हैं। सोमवार को पहले दिन सीडीआरआई में प्रयागराज, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर जिलों से बच्चे आए थे। कार्यक्रम का मकसद बच्चों को ये बताना था कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन में कितना महत्वपूर्ण है। बच्चों ने उन्होंने सुबह से शाम तक संस्थान की उन्नत प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों के साथ मिलकर विभिन्न प्रयोगों में वैज्ञानिकों का हाथ भी बंटाया।
वैज्ञानिकों से मिले बच्चों के उत्सुकता भरे सवालों के जवाब
- बच्चों ने पूछा कि अपनी खोज और नवाचारों को वो किस जर्नल में प्रकाशित करा सकते है। इस पर वैज्ञानिकों ने जवाब दिया कि यंग साइंटिस्ट के लिए फ्रंटियर्स जर्नल में इसे प्रकाशित करा सकते हैं।
- बच्चों को जेनेटिक्स के पिता- ग्रेगर जाॅन मेंडल का उदाहरण देते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि अपने शोध और नवाचार का प्रमाणन कितना जरूरी है।
- वैज्ञानिकों ने बताया कि वैज्ञानिक बनने के लिए पीएचडी करना जरूरी नहीं, शोध और उसका डाटा प्रामाणिक होना चाहिए।
राजधानी के केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में सोमवार को अगल-अलग जिलों से आए होनहार विद्यार्थियो