मथुरा-वृंदावन रोड पर लगे जाम में फंसे वाहन
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बलरामपुर अस्पताल के गेट-परिसर में भीषण जाम ने सोमवार दोपहर एक मासूम की जान ले ली। एंबुलेंस दस मिनट तक गेट पर ही रही। इसके बाद परिसर में भी जाम मिला। इस बीच बच्चे की हालत बिगड़ गई और इमरजेंसी तक पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। तीमारदार शव लेकर चले गए। उनका कहना था रास्ते में कई जगह एंबुलेंस जाम में फंसी रही। एक घंटे की दूरी तय करने में दो घंटा लग गया।
माल इलाके के हरिपाल के सात माह के बेटे आयुष को तीन दिन पहले बुखार आने के साथ जुकाम हुआ। निजी क्लीनिक से उसका उपचार कराया गया। सोमवार सुबह सांस लेने में तकलीफ होने पर तीमारदार उसे दोबारा क्लीनिक ले गए। डॉक्टर ने गंभीर बता बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। तीमारदार सुबह 11:30 बजे आयुष को लेकर बलरामपुर अस्पताल को निकले। रास्ते में कई जगह जाम में फंसकर एंबुलेंस दोपहर करीब डेढ़ बजे अस्पताल के कचहरी गेट पर पहुंची। यहां गेट पर रोडवेज बसों की वजह से जाम में फंस गई। काफी समय बाद यहां से आगे बढ़ी तो सुपर स्पेशिएलिटी वार्ड का मेन गेट बंद होने से अंदर नहीं घुस पाई। इस दौरान मासूम की सांसें उखड़ने लगीं। चालक मेन गेट पर पहुंचा तो वहां जाम में एंबुलेंस फंस गई। किसी तरह अंदर घुसी एंबुलेंस परिसर में भी लगे जाम के बीच रेंगते हुए इमरजेंसी तक पहुंची। डॉक्टरों ने जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया। हरिपाल का आरोप है कि जाम में एंबुलेंस फंसने और इलाज में देरी से बच्चे की मौत हुई हैै।
15 दिन पहले भी गई थी जान
बलरामपुर अस्पताल के गेट के सामने जाम में एंबुलेंस फंसने से करीब 15 दिन पहले एक महिला की मौत हुई थी। पुलिस ने गेट के पास लगीं अवैध दुकानें हटाई थीं, लेकिन दोबारा दुकानें सज गईं।