फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईएएस-आईपीएस के बीच विवाद पर बोले प्रमुख सचिव गृह, आईपीएस एसोसिएशन ने रद्द की बैठक

Tue, 12 Dec 2017 02:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
IAS logo
विज्ञापन
प्रमुख सचिव गृह ने कहा कि आईपीएस अफसरों के अधिकारों में हस्तक्षेप की शासन की कोई मंशा नहीं है। हम डीजीपी की ओर से पूर्व में आए सुझावों को शासनादेश में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं।
विज्ञापन


प्रमुख सचिव के इस आश्वासन के बाद आईपीएस एसोसिएशन ने मंगलवार को बुलाई गई बैठक रद्द कर दी है। यह बैठक मुख्य सचिव के तीन माह पुराने आदेश पर आईपीएस अफसरों की राय जानने के लिए एसोसिएशन के अध्यक्ष व डीजी फायर सर्विसेज प्रवीण सिंह ने बुलाई थी। 

प्रवीण सिंह ने बताया कि मुख्य सचिव के तीन माह पुराने आदेश को लेकर आईपीएस अफसरों में आवाज उठ रही थी। इसे दूर करने के लिए और आईपीएस अधिकारियों की राय जानने के लिए ही बैठक बुलाई गई थी।
विज्ञापन


लेकिन शाम होते-होते प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार का बयान आया जिसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई। प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की भूमिका पुलिस नियमावली और एक्ट में पहले से तय है। इसमें किसी तरह के संशोधन का कोई इरादा नहीं है।
विज्ञापन

डीजीपी ने दिया था कानून-व्यवस्था की बैठकों में थानाध्यक्षों को न बुलाने का सुझाव

आईजी कानून व्यवस्था हरिराम शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन विभाग ने बीती सात सितंबर को पत्र लिखा था।

मुख्य सचिव ने भी इसी आशय का एक पत्र भेजा था। इसमें कानून व्यवस्था से जुड़ी बैठक डीएम के स्तर से करने की बात है (क्राइम मीटिंग का जिक्र नहीं था)। इसमें थानाध्यक्षों को भी शामिल करने का आदेश था।

डीजीपी सुलखान सिंह की ओर से गृह विभाग को सात नवंबर को सुझाव दिया गया कि कानून व्यवस्था की बैठक में थानाध्यक्षों को न शामिल किया जाए।

त्यौहारों, वीआईपी ड्यूटी या अन्य किसी खास कार्यक्रमों के लिए होने वाली बैठक में थानाध्यक्षों को न बुलाया जाए। इसमें सीओ, उपजिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक और अपर जिलाधिकारी ही शामिल हों।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें