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फाइल तीन दिन से ज्यादा रोकी तो तय होगी जवाबदेही : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Tue, 06 Aug 2019 04:44 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की पाइप पेयजल परियोजनाओं की फाइलों को पौने दो साल से इधर-उधर घुमाने पर नाराजगी जताई है। बेहद तल्ख लहजे में कहा, वह खुद कई बार योजना की समीक्षा कर चुके हैं। इसके बाद भी अफसर काम शुरू करने की जगह फाइलों पर टिप्पणी ही कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा, किसी भी विभाग में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के पास फाइल तीन दिन से अधिक रुकी तो जवाबदेही तय की जाएगी। यह आदेश उनके और मुख्य सचिव कार्यालय पर भी लागू होगा।

सीएम ने लोकभवन में बुंदेलखंड और विंध्याचल क्षेत्र की पाइप पेयजल योजना की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने इन परियोजनाओं को लेकर पक्ष रखना चाहा तो मुख्यमंत्री ने उनकी भी नहीं सुनी। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बैठक के मिनट्स आपके पास भी आते हैं, ऐसे में जवाबदेही तो आपकी भी बनती है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड व विंध्याचल क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अफसरों का काम बैरियर बनना नहीं, बल्कि काम को गति देना है। फाइल को इधर-उधर घुमाने से बेहतर होगा कि आपस में बैठ कर समस्या का हल निकालें। इसके बावजूद भी कोई दिक्कत हो तो मुख्य सचिव या मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से वार्ता कर समस्या का समाधान करें और जरूरत हो तो उन्हें भी बताएं।

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हर महीने डेड लाइन तय कर योजनाओं को पूरा कराएं

उन्होंने कहा, फाइलों में आपत्तियों का निस्तारण कर हर महीने की डेडलाइन बनाकर योजना को पूरा कराएं। बैठक में ग्राम्य विकास मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

एक-दो दिन में कार्य योजना पर फिर करेंगे वार्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से विभागों का बजट आ चुका है। एक महीने पहले अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को बजट खर्च करने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में फिर अधिकारियों की बैठक लेकर कार्ययोजना पर बात करेंगे।

हर हफ्ते दिल्ली जाने वालों अफसरों की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ अफसर शुक्रवार से मंगलवार तक दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जाते हैं। हर हफ्ते दिल्ली जाने वाले अधिकारियों की मुझे प्रदेश में जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, सरकारी सुविधा एक ही जगह मिल सकती है। अगर अफसरों ने लखनऊ और दिल्ली में आवास स्वीकृत करा रखा है तो दिल्ली का आवास आवंटन रद्द कराएं।
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