आरटीआई के तहत सरकारी कार्यालयों से मांगी गई किसी भी तरह की सूचना देने में बहानेबाजी नहीं चलेगी। कुछ अपवादों को छोड़कर सूचना देना सूचना का अधिकार अधिनियम का मुख्य मकसद है। जानबूझकर तथ्य छिपाकर सूचना न देना जिम्मेदारों को भारी पड़ेगा। दोष साबित होने पर इनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
यह चेतावनी सोमवार को प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने दी। वह कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के जन सूचना तथा प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, सूचना का अधिकार अधिनियम सरकारी कार्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता लाने व भ्रष्टाचार दूर करने का एक अचूक कदम है। गुड गवर्नेंस की अवधारणा बिना इसके संभव नहीं हो सकती।
इसलिए जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों की मंशा हरसंभव सूचना उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। इसमें बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। अधिनियम में उल्लिखित ठोस एवं विधिक कारणों के आधार पर ही सूचना देने से इन्कार किया जा सकता है। इसके इतर बाकी सभी सूचनाएं आवेदक को देना जरूरी है। इसमें जानबूझकर लेटलतीफी या सूचना न देने पर जिम्मेदार को जुर्माना झेलना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण का पहला चरण जनवरी 2016 से शुरू हुआ था, जो पूरा हो गया है। दूसरे चरण में लखनऊ, आगरा एवं मेरठ मंडल के जिलों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्, मंडलायुक्त अनिल गर्ग, आयोग के सचिव उदयवीर सिंह यादव, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा व सीडीओ प्रशांत शर्मा मौजूद रहे।