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गमजदा माहौल में निकला चेहल्लुम का जुलूस

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इरफान की खबर के साथ फोटो कुलदीप सिंह पुराने लखनऊ के इमामबाड़ा नाज़िम साहब से कर्बला तालकटोरा तक निक
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लखनऊ। रोते है सब खास-ओ-आम चेहल्लुम हुआ तमाम। चले आओ ए जव्वारों चले आओ, मेरी आवाज पे लब्बैक पुकारे जाओ। दर्द भरे नौहों और या हुसैन की सदाओं के साथ हजारों की तादाद में गमजदा चेहरों ने नम आंखों से कर्बला के शहीदों को पुरसा दिया। रविवार को अजादार, इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों का चालीसवां मनाने के लिए नंगे पांव चेहल्लुम में जुलूस में शामिल हुए। मातमी अंजुमनें अपने-अपने अलम के साथ आंखों में अश्क भरे मातम करती हुईं चल रहीं थी।
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चेहल्लुम के जुलूस में शामिल होने को अंजुमन व अजादार बड़ी तादाद में सुबह से ही विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर में इमामबाड़े में इमाम ए जुमा मौलाना कल्बे जव्वाद ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि कर्बला में शहीदों को अगर सच्चा पुरसा देना है तो हजरत इमाम हुसैन की शिक्षाओं पर अमल करना जरूरी है। अजादारों ने इन तबर्रुकात की जियारत कर दुआएं मांगीं। जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से नक्खास चौराहा, टूरियागंज, हैदरगंज, बुलाकी अडडा, एवरेडी चौराहा होते हुये देर शाम तालकटोरा कर्बला पहुंच कर सम्पन्न हुआ। जुलूस को लेकर जिला प्रशासन की ओर से कड़े बंदोबस्त किए गए थे। युवाओं ने जुलूस मार्ग पर क्लीन जुलूस अभियान चलाकर सबीलों पर निशुल्क कूड़ेदान रखे और सड़क पर बिखरा कचरा उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया।
अरबईन वॉक में शामिल होकर मनाया गम
ईराक की तर्ज पर राजधानी में भी लखनऊ अरबईन वॉक सफर-ए-इश्क में शामिल होकर अजादारों ने कर्बला के शहीदों का गम मनाया। राजधानी के बीकेटी स्थित कर्बला-ए-अब्बासिया व हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ इमामबाड़ा से अरबईन वॉक निकाली गई। दोपहर में हू इज हुसैन इंडिया के लखनऊ चैप्टर की ओर से शाहनजफ से कर्बला तालकटोरा के लिए निकले वॉक में सैकड़ों अजादार शामिल हुए। सबीलों पर चाय और पानी के साथ ही दूध, बिरयानी, खिचड़ा, दाल, चावल आदि खिलाया जाता रहा। लोगों ने वॉक में शामिल लोगों के पैर दबाकर सेवा की। कई जगह चिकित्सा शिविर भी लगे।
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खून से लिखे पत्र भेजे
सऊदी अरब स्थित जन्नतुल बकी में पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल की बेटी हजरत फातिमा सहित उनके परिवार के रौजों के पुनर्निर्माण के लिए जुलूस के दौरान करीब 6000 लोगो के पत्र केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को भेजे गए। इसमें काफी तादाद में खून से लिखे पत्र भी शामिल थे।
कर्बला के शहीदों की दिलाई नज्र
हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों की नज्र दिलाकर उन्हें पुरसा दिया गया। सआदतगंज हसनपुरिया स्थित अजाखाना हजरत अबुल फजलिल अब्बास नूर हाल में इदरे सकीना की ओर से कर्बला के शहीदों के चेहल्लुम की मजलिस हुई जिसे मौलाना बाकर मशहदी ने खिताब किया। इसके बाद कर्बला के शहीदों की नज्र दिलाकर उन्हें खिराजे अकीदत पेश की गई।
18 बनी हाशिम का काफिला भी निकला
अजादारों को 18 बनी हाशिम के ताबूत की जियारत कराई गई। सआदतगंज स्थित राहत-ए-सुल्तान मस्जिद में मजलिस को मौलाना मुमताज जाफर ने खिताब किया। मजलिस के बाद अट्ठारह बनी हाशिम का काफिला कर्बला दियानुददौला पहुंच कर संपन्न हुआ। वहीं, गोलागंज स्थित जामिया इमामिया तंजीम उल मकातिब में रात शब्बेदारी का दौर जारी रहा।
सुन्नी समुदाय ने भी दिया शहीदों को पुरसा
सुन्नी समुदाय ने भी ताजियों के साथ शहीदों को पुरसा दिया। रविवार को गम ए हुसैन में डूबे सुन्नी समुदाय के अजादार जुलूस की शक्ल में बादशाहनगर स्थित करबला पर अपने अपने ताजिया लेकर पहुंचे। अलीगंज, इंदिरा नगर, गोमती नगर व चिनहट आदि इलाकों से कर्बला पहुंचे सुन्नी समुदाय ने ताजिया दफन किया और घरों में नज्र का आयोजन कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
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