यूपी के विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने संसदीय कार्यमंत्री को लघु सिंचाई विभाग की ओर से प्रदेश में बनाए गए चेकडैमों के निर्माण में अनियमितता के आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। यह मुद्दा हर्रैया (बस्ती) के विधायक अजय सिंह ने नियम-51 के अंतर्गत उठाया था। चेकडैमों के निर्माण में इस कदर गड़बड़ी हुई है कि सिर्फ प्रतापगढ़ जिले की जांच में ही 27 अफसरों पर कार्रवाई हो रही है।
अजय ने कहा कि सपा शासन में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा ने लघु सिंचाई विभाग द्वारा प्रतापगढ़ में 46 करोड़ व इलाहाबाद मंडल में 200 करोड़ से बने चेकडैमों के निर्माण में अनियमितता की जांच की मांग की थी। इस जांच में लीपापोती हुई है। अजय ने चेकडैमों के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली की बात कहते हुए सरकार से सभी 18 मंडलों में बनाए गए चेकडैमों की टीएसी जांच और इनकी सार्थकता व भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि प्रतापगढ़ के संडवा चंद्रिका में बनाए गए चेकडैम की टीएसी जांच कराई गई है। रिपोर्ट के आधार पर 22 अवर अभियंता, तीन सहायक अभियंता, एक अधिशासी अभियंता और एक सेवानिवृत्त प्रभारी अधीक्षण अभियंता पर कार्रवाई हो रही है। इस मामले में विशेष सचिव लघु सिंचाई को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने अजय को निर्देश दिए कि वे संसदीय कार्यमंत्री से मिलकर तथ्य उपलब्ध कराएं, जांच करा दी जाएगी। गौरतलब है ओझा ने जब यह मामला उठाया था उस समय लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह थे। अजय, हर्रैया से राजकिशोर को ही हराकर विधायक चुने गए हैं।