लखनऊ। सोने के कलशवा में खिरीया बनावली सोने प्राता दिहली सजाय हे छठी माता…..जैसे छठ मइया के गूंजते गीतों के बीच छठ महापर्व की रौनक बढ़ती जा रही है। महापर्व के दूसरे दिन व्रत रखने वालों ने खरना प्रसाद बनाया, खुद खाया और सबको खिलाया। इसी के साथ शुरु हुआ 36 घंटे का निराजल उपवास, जिसका पारण सोमवार को सुबह उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद होगा।
शहर के प्रमुख छठ मेला घाट लक्ष्मण मेला स्थल से लेकर झूलेलाल घाट तक शनिवार को भी व्रती महिलाएं पहुंचीं। सुशोभिताओं को सजाया, डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की और घर जाकर खरना किया। हालांकि मुख्य पूजन घाटों पर रविवार से ही शुरू होगा।
घर में ही प्रतीकात्मक घाट सजाया, परिवार के साथ पूड़ी-खीर खाई
गोमतीनगर के विराजखंड निवासी नीलिमा सिंह कहती हैं कि बच्चों, सहेलियों के साथ पूजा की। खरना में गुड़-चावल-दूध की खीर बनाई जाती है। पूड़ी भी बनाई। उसी का भोग लगाया और सबने मिलकर खाया। सुशोभिता जहां पर बनाई है, उसे ही प्रतीकात्मक घाट मानते हुए हम लोग रविवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे।
मन्नत के दस सूप के नाम जलाए दस दीपक
आम्रपाली अवध अपार्टमेंट आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ममता झा ने भी खरना प्रसाद बनाया। कहती हैं कि केले के पत्ते पर पूड़ी केला खीर का प्रसाद रखकर पहले छठ मइया को भोग लगाया। दस दीपक जलाए। कहती हैं कि जितने सूप उतने दीए। बताया कि कुछ सूप मेरी मन्नत के तो कुछ ऐसे हैं जो लोग रख गए हैं कि मेरी तरफ से प्रसाद अर्पण कर दें।
बेटे ने मां से लिया व्रत
प्रसन्न कुमार झा, मूलतः मधुबनी जिले के निवासी हैं। कहते हैं कि चार साल से लखनऊ में रह रहा हूं। मेरी मां व्रत किया करती थीं। बचपन से उन्हें व्रत करते देख रहा था, वही संस्कार बचपन से थे। एक बार बेटी की तबीयत कुछ खराब थी, मां की उम्र भी हो रही थी। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो व्रत उठा लो। बस मां की आज्ञा पूरी की और व्रत रखने लगा। सात साल से यह सिलसिला चल रहा है।
फोटो कैप्शन- जगमगा रहे घाट
छठ मइया के पूजन के लिए घाटों को बड़ी खूबसूरती से सजाया गया है। शनिवार रात लक्ष्मण मेला मैदान पर रंग-बिरंगी लाइटें जगमगाईं। तो वहीं सांझिया भी सुनहरे रंग व सुनहरी रोशनी से चमचमा रहा है। शहर में रविवार को 100 से अधिक घाट, कुंड, तालाब पर पूजा होगी।