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Lucknow News: नगर निगम कार्यकारिणी की पहली महिला उपाध्यक्ष बनीं चरनजीत

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महिला उपाध्यक्ष बनीं चरनजीत
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लखनऊ। नगर निगम के 64 वर्ष के इतिहास में पहली बार नगर निगम कार्यकारिणी की उपाध्यक्ष कोई महिला पार्षद बनी है। शुक्रवार को हुए चुनाव में भाजपा पार्षद चरनजीत गांधी निर्विरोध उपाध्यक्ष चुनी गईं। खास बात यह है कि बृहस्पतिवार रात तक कई लोगों के नाम चल रह थे और चरणजीत के नाम की चर्चा तक नहीं थीं। इस निर्वाचन में सबको चौंकाया भी।
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नगर निगम की बारह सदस्यीय कार्यकारिणी में भाजपा के 10 और सपा के दो सदस्य हैं। ये तय था कि भाजपा का ही व्यक्ति उपाध्यक्ष बनेगा मगर कोई महिला बनेगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। जो नाम चल रहे थे उनमें भाजपा पार्षद अरुण राय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में था क्योंकि इनके पीछे शहर के सांसद के बेटे की सिफारिश बताई जा रही थी।
दूसरे नंबर पर पार्षद राजेश सिंह गब्बर का नाम था जिनके लिए उप चुनाव में विजयी हुए का विधायक की सिफारिश बताई जा रही थी। अनुराग मिश्रा अन्नू और भृगुनाथ शुक्ला के नाम भी चर्चा में थे। इनके लिए भी संगठन के एक नेता और एक राज्यसभा सांसद की सिफारिश बताई जा रही थी। इन बड़ी सिफारिशों के बाद एक महिला पार्षद का नाम आगे आया जो पिछले नगर निगम चुनाव में ही सपा छोड़कर भाजपा में आई थीं। चरणजीत के पति राजीव गांधी सपा के टिकट पर मौजूदा उपमुख्मंत्री ब्रजेश पाठक के खिलाफ कैंट विधानसभा से पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव हारने के बाद वह ब्रजेश पाठक के ही कहने पर ही भाजपा में शामिल हुए थे। जानकारों का कहना है कि यह उसी का फल दिया गया है।
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यह भी चर्चा है कि बड़े नेताओं की सिफारिशों के चलते कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के लिए नाम तय नहीं हो पा रहा था। ऐसे में सभी सिफारिशों को छोड़ एक नए चेहरे के रूप में महिला पार्षद का नाम तय किया गया ताकि विवाद भी दूर हो और महिला उपाध्यक्ष बनाए जाने का राजनीतिक फायदा भी मिल सके।



64 साल में नहीं बनी कोई महिला उपाध्यक्ष



वरिष्ठ पार्षद गिरीश मिश्रा ने बताया उनकी जानकारी में नगर निगम के 64 साल के इतिहास में कोई महिला कार्यकारिणी उपाध्यक्ष नहीं हुई। करीब 25 साल पहले एक महिला उप महापौर तो बनी थीं मगर कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पद पर पुरुषों का ही कब्जा रहा। यह पहला मौका है जब एक महिला उपाध्यक्ष चुनी गई हैं। नगर निगम को तीसरी सरकार कहा जाता है। अब सरकार के दो मुख्य पदों पर महिलाएं विराजमान हैं। महापौर पद पर सुषमा खर्कवाल पहले से हैं और अब उपाध्यक्ष पद पर चरनजीत गांधी चुनी गई हैं।



एक साल रहेगा कार्यकाल

कार्यकारिणी सदस्य कार्यकाल दो साल का होता है। सदस्य के तौर पर चरनजीत गांधी एक साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं। ऐसे में अब एक साल तक ही वह उपाध्यक्ष पद पर रह सकेंगी। जो छह नए सदस्य एक सप्ताह पहले चुने गए हैं उनमें से कोई उपाध्यक्ष बनता तो वह दो साल तक इस पद पर रहता।





शहर के विकास के लिए करेंगी काम



उपाध्यक्ष बनने के बाद चरनजीत गांधी ने कहा कि वह शहर के विकास के लिए सभी पार्षदों के साथ मिलकर काम करेंगी। जनता से जुड़े मसलों को अफसरों के सामने रखा जाएगा और प्रयास होगा कि समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो।
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महिला उपाध्यक्ष बनीं चरनजीत

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